पदोन्नति-युक्तियुक्तकरण मामले में निलंबन, अब जवाबदेही पर सवाल
तीन सदस्यीय जांच में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता; क्या कार्रवाई की जद में आएंगे अन्य जिम्मेदार?

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
युक्तियुक्तकरण और संशोधित पदोन्नति प्रकरण में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता पाए जाने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पाण्डेय ने कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्रवाई के बाद अब सवाल यह है कि जांच में सामने आई प्रक्रियात्मक अनियमितताओं की जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है।

सीएम हेल्पलाइन से प्राप्त शिकायत के बाद गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने 31 अगस्त और 23 सितम्बर 2026 को प्रतिवेदन प्रस्तुत किए। संबंधित अभिलेखों के परीक्षण और कारण बताओ नोटिस की प्रक्रिया के बाद 25 सितम्बर को दिए गए यादव के जवाब को विभाग ने संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के तहत निलंबन आदेश जारी किया गया।
जांच में युक्तियुक्तकरण एवं संशोधित पदोन्नति से जुड़े प्रक्रियाओं और अभिलेखों की पड़ताल की गई है। ऐसे में निलंबन के साथ अब विभाग के सामने अगली चुनौती जांच में सामने आए प्रत्येक तथ्य की जिम्मेदारी तय करने की है।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक आदेश में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं है। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका अथवा दोष के संबंध में निष्कर्ष आगे की विभागीय जांच के अंतिम परिणाम के आधार पर ही निकाला जाना उचित होगा।
निलंबित कर्मचारी का मुख्यालय शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दयालबंद, विकासखंड बिल्हा निर्धारित किया गया है। वर्तमान कार्रवाई प्रथमदृष्टया अनियमितता के आधार पर हुई विभागीय कार्रवाई है, अंतिम दोषसिद्धि नहीं।



