
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर (न्यायधानी)। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में संचालित नामी निजी शिक्षण संस्थान ‘ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल’ (BPS) की मान्यता को लेकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्कूल प्रबंधन पर आरोप है कि उन्होंने रसूख के दम पर शिक्षा विभाग और सीबीएसई (CBSE) के नियमों को ताक पर रखकर हजारों अभिभावकों और छात्रों के साथ विश्वासघात किया है। बहतराई, मिशन रोड और व्यापार विहार की विभिन्न शाखाओं में मान्यता के दस्तावेजों में हेरफेर कर शिक्षा को व्यापार बनाने का यह संगठित खेल अब जनता के सामने उजागर हो गया है।

बहतराई मुख्य शाखा की मान्यता का सच
इस दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि बहतराई स्थित स्कूल की मुख्य शाखा की सीबीएसई संबद्धता (मान्यता क्रमांक 3330408) मार्च 2024 में ही समाप्त हो चुकी है और वर्तमान सत्र के लिए इसका नवीनीकरण नहीं कराया गया है। इसके विपरीत, जून 2025 से जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इसे शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत केवल आगामी तीन वर्षों (2028 तक) के लिए स्थानीय विभागीय मान्यता जारी की गई है। साफ है कि बहतराई शाखा वर्तमान में सीबीएसई से संबद्ध नहीं है, फिर भी वहां सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई और वसूली जारी है।
संबद्धता और पते का संदिग्ध खेल
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि बहतराई शाखा में पढ़ रहे कक्षा 9 वीं से 12 वीं के लगभग 250 छात्रों को मिशन स्कूल रोड शाखा की सीबीएसई संबद्धता (कोड 3330074) के नाम पर बोर्ड परीक्षा में शामिल कराया जा रहा है। सूत्रों और पालकों का दावा है कि प्रबंधन ने दस्तावेजों में पोस्टल एड्रेस और संसाधनों की अदला-बदली कर एक बड़ा षड्यंत्र रचा है। यह न केवल सीबीएसई के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि छात्रों के भविष्य को कानूनी अधर में डालने जैसी स्थिति है।
करोड़ों की टैक्स चोरी का षड्यंत्र ?
पालकों का आरोप है कि इस कागजी हेरफेर के पीछे करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का खेल छिपा हो सकता है। बहतराई शाखा, जहाँ छात्रों की संख्या 2500 से अधिक है और औसत सालाना फीस ₹1 लाख से सवा लाख रुपये तक वसूली जाती है, उसे कम छात्र संख्या और कम फीस वाली मिशन रोड शाखा के नाम पर ‘अघोषित’ रूप से संचालित दिखाया जा रहा है। आय और संसाधनों का यह बेमेल विवरण सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है।
छात्रों का मानसिक उत्पीड़न और RTE का उल्लंघन
स्कूल की व्यापार विहार और मिशन रोड शाखाओं में सीबीएसई के नाम पर प्रवेश लेकर साल भर पढ़ाई कराई गई, लेकिन अंतिम समय में छात्रों को स्थानीय बोर्ड (5 वीं और 8 वीं) की परीक्षा देने पर मजबूर किया गया। आरटीई (RTE) अधिनियम 2009 के तहत किसी भी बच्चे को मानसिक उत्पीड़न देना प्रतिबंधित है, लेकिन प्रबंधन की लापरवाही के कारण छोटे-छोटे बच्चे दोबारा परीक्षा देने के तनाव से गुजर रहे हैं। बिना वैध मान्यता के कक्षाएं संचालित करना शिक्षा के अधिकार कानून की शर्तों का खुला उल्लंघन है।
प्रशासनिक चुप्पी और रसूख का प्रभाव ?
उल्लेखनीय है कि जुलाई 2019 में भी संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग की जांच में इस स्कूल में प्रयोगशाला और खेल मैदान के अभाव के बावजूद अवैध शुल्क वसूली की पुष्टि हुई थी, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में प्रबंधन के हौसले बुलंद रहे। वर्तमान में अभिभावकों द्वारा कलेक्टर आवास के घेराव और केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के हस्तक्षेप के बाद जांच कमेटी तो गठित हुई है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की अब तक की ‘नरम’ कार्रवाई ने न्याय की उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



