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पत्नी के सम्मान और संघर्ष की कहानी, अशोक व्यास की 15वीं पुस्तक ‘एक पत्नी पर पुस्तक क्यों?’ का विमोचन

मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाओं के जीवन, संघर्ष, समर्पण और आत्मसम्मान को समर्पित पुस्तक; पत्नी बबीता व्यास की प्रेरणा को लेखक ने बताया अपनी साहित्यिक यात्रा का आधार

बिलासपुर। प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क।

मां पर लिखने की परंपरा तो खूब रही, लेकिन पत्नी के संघर्ष, योगदान और समर्पण को साहित्य में वह स्थान कम ही मिला, जिसकी वह हकदार है। इसी सोच को केंद्र में रखकर वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अशोक व्यास ने अपनी 15वीं पुस्तक ‘एक पत्नी पर पुस्तक क्यों?’ लिखी है। पुस्तक का विमोचन कुदुदंड स्थित बुक्स क्लिनिक भवन में किया गया।

अशोक व्यास के अनुसार, लगभग 190 पृष्ठों की यह पुस्तक मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाओं के जीवन, उनकी रोजमर्रा की चुनौतियों, साहस, त्याग, प्रेम, समर्पण और आत्मसम्मान की कहानी कहती है। पुस्तक का केंद्रीय पात्र ‘बबीता’ है, जिसके जीवन के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया है कि कठिन परिस्थितियों का सामना कैसे किया जाए और पत्नी के योगदान को सम्मान देना क्यों जरूरी है।

लेखक का कहना है कि पुस्तक के प्रसंग केवल एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि उन असंख्य महिलाओं के अनुभवों से जुड़े हैं, जो परिवार और समाज के बीच अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए अनेक चुनौतियों का सामना करती हैं। सरल हिंदी में लिखी गई कहानियों के जरिए पाठकों तक जीवनोपयोगी संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

लेखन का उद्देश्य सामाजिक जागरूकता

अशोक व्यास ने कहा कि उनके लिए पुस्तकों की सार्थकता केवल पाठकों की संख्या से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि उनका लेखन कितने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला पाता है। यदि पुस्तक की कहानियों से कुछ लोगों की सोच और व्यवहार में भी परिवर्तन आता है, तो वे अपने प्रयास को सफल मानेंगे।

उन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा में पत्नी श्रीमती बबीता व्यास के योगदान का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने हमेशा उन्हें पत्रकारिता और लेखन के माध्यम से सामाजिक जागरूकता लाने के लिए प्रेरित किया। लेखक के अनुसार, यही प्रेरणा उनकी लेखन यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण रही है।

15 पुस्तकों की साहित्यिक यात्रा

अशोक व्यास इससे पहले कविता संग्रह ‘साक्षी’ की सात कड़ियों सहित ज्योतिष, व्रत-विधान और धार्मिक विषयों पर कई पुस्तकें लिख चुके हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में ‘समस्याएं आपकी, समाधान हमारे’, ‘समस्त व्रत पूजा विधान’, ‘सत्यनारायण व्रत कथा’, ‘मंत्र बोलते हैं भाग्य खोलते हैं’ और ‘मुहूर्त हाथ में, सफलता साथ में’ शामिल हैं। ‘एक पत्नी पर पुस्तक क्यों?’ उनकी 15वीं पुस्तक है।

विमोचन समारोह में साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति

बुक्स क्लिनिक के डायरेक्टर हितेश सिंह बिसेन, को-डायरेक्टर ऋचा सिंह बिसेन, अनिका सिंह बिसेन, मैनेजर पवन शर्मा, साक्षी व्यास, चंद्र प्रकाश उपाध्याय, जय प्रकाश, अखिलेश, बृजेश, ओमप्रकाश उपाध्याय, रविंद्र तेलंग, वीना बचानी, नवीन बचानी, गजेंद्र जायसवाल, विनोद सोनी, ललिता मिश्रा, रजनी केशरवानी, पल्लवी पांडेय, राजेश कुमार बंजारे, कलप सिंह, आशीष धुरी, लव थवाईत, गीतेश प्रकाश, भूमिका साहू, दिव्या सिंगरौल, मानसी पटेल, ओजस वस्त्राकर, अनुराग रजक, भूमिका राठौर और नीलम विंध्यराज सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

प्रचंड प्रहार की बात: परिवार की नींव मजबूत करने में महिलाओं की भूमिका अक्सर जिम्मेदारियों के बीच अनदेखी रह जाती है। ‘एक पत्नी पर पुस्तक क्यों?’ इसी योगदान को शब्द देने की कोशिश है। रिश्तों में सम्मान केवल कहने से नहीं, बल्कि व्यवहार में उसे स्थान देने से स्थापित होता है।

Prachand Prahar

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