शिकायत से निलंबन तक पहुंचा मामला, अब गौरहा ने उठाया जवाबदेही का सवाल
पदोन्नति-युक्तियुक्तकरण पर पांच शिकायतों के बाद जांच और कार्रवाई; बोले—सिर्फ निलंबन नहीं, पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
बिलासपुर शिक्षा विभाग में पदोन्नति और युक्तियुक्तकरण से जुड़े मामले में तीन सदस्यीय जांच के बाद कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील कुमार यादव के निलंबन से कार्रवाई का एक चरण पूरा हुआ है। अब शिकायतकर्ता कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने पूरे प्रकरण की प्रक्रिया और जवाबदेही की जांच आगे बढ़ाने की मांग दोहराई है।

गौरहा ने फरवरी से मई 2026 के बीच पांच अलग-अलग शिकायतें प्रस्तुत की थीं। इनमें पदोन्नति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट, युक्तियुक्तकरण, वरिष्ठता और न्यायालयीन आदेशों के पालन से जुड़े मामलों की जांच की मांग की गई थी। उन्होंने संबंधित मूल नस्ती, नोटशीट, पत्राचार, पदोन्नति एवं वरिष्ठता सूची तथा पदस्थापना संबंधी अभिलेखों के परीक्षण की मांग भी की थी।
शिकायतों के बाद जांच, फिर निलंबन
सीएम हेल्पलाइन से प्राप्त शिकायत के बाद तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने 31 अगस्त और 23 सितम्बर 2026 को प्रतिवेदन प्रस्तुत किए। संबंधित अभिलेखों की जांच और कर्मचारी का जवाब लेने के बाद विभाग ने प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता के आधार पर सुनील यादव को निलंबित किया।
गौरहा का कहना है कि निलंबन की कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ है कि शिकायतों में उठाए गए विषयों की जांच आवश्यक थी। हालांकि, उनके अनुसार अब यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जिन प्रक्रियाओं पर सवाल उठे थे, उनमें निर्णय किस स्तर पर हुए और यदि जांच में कहीं नियमों के उल्लंघन की जिम्मेदारी सामने आती है तो संबंधित स्तर पर क्या कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर विभागीय प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच और प्रभावित शिक्षकों के अधिकारों की समीक्षा कराना है। उनके मुताबिक यदि किसी शिक्षक की पदोन्नति, पदस्थापना या युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में वास्तविक रूप से नुकसान हुआ है, तो नियमानुसार उसका निराकरण होना चाहिए।
अब सवाल कार्रवाई की सीमा का
गौरहा की शिकायतों में उठाए गए बिंदु कई विभागीय प्रक्रियाओं से संबंधित थे। इसलिए मौजूदा निलंबन के बाद स्वाभाविक सवाल यह है कि क्या जांच का दायरा संबंधित कर्मचारी तक सीमित रहेगा या पूरी निर्णय-प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों की भी व्यापक समीक्षा होगी।
हालांकि, उपलब्ध विभागीय आदेश में सुनील कुमार यादव के संबंध में ही प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता का उल्लेख है। अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों को दोषी ठहराने का कोई अंतिम निष्कर्ष उसमें दर्ज नहीं है। इसलिए आगे की जिम्मेदारी का निर्धारण विभागीय जांच और सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जाना उचित होगा।
गौरहा के लिए यह कार्रवाई उनकी शिकायतों पर हुई जांच का परिणाम है; विभाग के लिए अब चुनौती यह है कि जांच में सामने आए तथ्यों की पूरी कड़ी को निष्पक्ष रूप से परखा जाए।



