October 26, 2026 |
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लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन : १२० दिन से जारी संघर्ष, अपने आशियाने को बचाने की लड़ाई

इन घरों में केवल ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि उनकी यादें, भावनाएं और भविष्य की उम्मीदें भी बसती हैं।

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र के लिंगियाडीह में पिछले १२० दिनों से लगातार अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी है। यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने घर-आंगन और जीवन भर की कमाई से बनाए गए आशियाने को बचाने की लड़ाई है।

लिंगियाडीह के सैकड़ों परिवार पिछले तीन महीनों से सड़क पर बैठकर अपनी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इन परिवारों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत, खून-पसीने की कमाई और उम्मीदों के सहारे अपने घर बनाए हैं। इन घरों में केवल ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि उनकी यादें, भावनाएं और भविष्य की उम्मीदें भी बसती हैं। धरना स्थल पर हर दिन महिलाएं, बुजुर्ग और युवा एक साथ बैठकर अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

किसी टकराव या विवाद की राह नहीं चाहते

आंदोलनकारियों का कहना है कि वे किसी टकराव या विवाद की राह नहीं चाहते, बल्कि सरकार से संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा रखते हैं। उनका मानना है कि किसी भी निर्णय से पहले वहां रहने वाले लोगों की भावनाओं और परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। 4 माह से जारी यह आंदोलन अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह आम नागरिक के आवास, अधिकार और सम्मान से जुड़ा सवाल बन गया है। लगातार लंबा खिंचते इस धरने ने यह भी दिखाया है कि जब लोगों के घर और अस्तित्व पर संकट आता है, तो वे शांतिपूर्ण तरीके से भी अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित रहते हैं।

सपनों का घर न टूटे

ऐसे में जरूरत है कि छत्तीसगढ़ सरकार और प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करे और ऐसा समाधान निकाले जिससे लोगों का आशियाना सुरक्षित रहे और आंदोलन को सम्मानजनक विराम मिल सके। लिंगियाडीह के लोगों की मांग सिर्फ इतनी है कि उनके सपनों का घर न टूटे और उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे। सरकार यदि संवेदनशीलता के साथ इस विषय पर निर्णय लेती है, तो न केवल सैकड़ों परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा

Prachand Prahar

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