August 24, 2026 |
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अवैध प्लॉटिंगछत्तीसगढ़बिलासपुर

यत्र – तत्र – सर्वत्र ! @ अवैध प्लॉटिंग का मायाजाल, छोटे – छोटे टुकड़ों में हो रहा नामांतरण…

सुशासन तिहार के बावजूद, जमकर फलफूल रहा अवैध प्लाटिंग का कारोबार 

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में अवैध प्लॉटिंग करने का सिलसिला बदस्तूर जारी है और इस अवैध कारोबार को बंद नही करा पाना प्रशासनिक अधिकारियों के कारगुज़ारियों को उजागर कर रहा है। सस्ते दाम और भविष्य में तेजी का लालच देकर दलाल खेती की जमीन को टुकड़ों में बेच रहे हैं और राजस्व विभाग के मैदानी अमले की मिलीभगत से यह कारोबार बेखौफ चल रहा है।

शहर के आसपास मोपका, चिल्हाटी, सिरगिट्टी, तोरवा, सकरी, मंगला, बैमा-नगोई, कोनी, रतनपुर रोड और उसलापुर जैसे क्षेत्रों में अवैध कारोबार को बेधड़क अंजाम दिया जा रहा है। खुलेआम खेतों की मेढ़ काटकर बिना किसी ले-आउट स्वीकृति, बिना किसी अनुमति के प्लॉट काटे जा रहे हैं और कॉलोनी बनाने के नाम पर केवल नक्शे दिखाकर ग्राहकों को बेचा जा रहा है।

क्या यह सब मिलीभगत के बिना संभव है ?

कई मामलों में दलालों ने बाकायदा प्लॉट नंबरिंग कर सड़क, नाली व पानी का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये वसूल लिए हैं। नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण लोग इन दलालों के चंगुल में फंसकर अपनी जमा पूंजी इन्हें सौंपकर जमीन की रजिस्ट्री करा लेते हैं और धोखा खाते हैं।सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन धोखाधड़ी में सरकारी तंत्र की निष्क्रियता भी बराबर की भागीदार है। पटवारी बिना किसी सत्यापन के रजिस्ट्री के लिए दस्तावेज जारी कर रहे हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह सब मिलीभगत के बिना संभव है ?

बिल्डर पैसा कमाकर भाग जाते है…

शहर से लगे मंगला क्षेत्र में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते किए रहे अवैध प्लॉटिंग के विरोध में वार्ड क्रमांक 13 के नवनिर्वाचित पार्षद ने क्षेत्र में जारी अवैध प्लाटिंग पर कार्यवाही को लेकर मीडिया से चर्चा की है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में मुख्यरूप से दीनदयाल कालोनी, धुरीपारा नया मोहल्ला सहित अन्य स्थानों पर बड़े पैमाने पर जगह जगह मुरूम का सड़क बनाकर, खेतों में प्लाट काटकर, कच्चा नाली बनाकर बेचा जा रहा है। प्लॉट बिक जाने के बाद बिल्डर पैसा कमाकर भाग जाते है। लोग जब एक दो साल बाद जब मकान बनाकर रहना शुरू करते है। तब लोग वहां बिजली, पानी, रोड की व्यवस्था, तथा पानी की समस्या से त्रस्त होकर पार्षद से गुहार लगाते हैं। और यह सब भार पार्षद के ऊपर आ जाता है।

गौरतलब हैं कि इस तरह से खुल्लेआम अवैध प्लाटिंग का अवैध कारोबार न की मंगला इलाके में ही फलफूल रहा है । अपितु शहर के अधिकांश इलाकों में भी अवैध प्लाटिंग का अवैध कारोबार जमकर फलफूल रहा है। फिर भी प्रशासन इस ओर कड़ा रुख नही अपना रहा है। जबकि छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार भी मनाया जा रहा है।

निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी ?

अवैध प्लॉटिंग पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी शहरी क्षेत्र में नगरीय निकाय की है। ग्रामीण क्षेत्र में राजस्व विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है। शहरी क्षेत्र में नगरीय निकाय के अधिकारी इस मामले में राजस्व विभाग पर निर्भर है। जमीन के बिक जाने के बाद जब मकान बनना शुरू होता है या मकान बन जाने के बाद जब कोई कानूनी दांवपेंच फंसता है तब नगरीय निकाय के अधिकारियों को इसकी जानकारी होती है। राजस्व विभाग की ओर से इस पर कड़ी निगरानी और कार्रवाई की जाए, तो अवैध प्लॉटिंग पर रोक लग सकती है।

सवालों के घेरे में जमीन दलालों और राजस्व विभाग का रवैया…

इस पूरे मामले में राजस्व विभाग का रवैया भी सवालों के घेरे में है। जमीनों के खरीदी बिक्री के दौरान पटवारी, आरआई, तहसीलदार की भूमिका अहम होती है। इसके बावजूद अवैध प्लॉटिंग बिना रोकटोक चल रही है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां विभाग ने केवल खानापूर्ति के लिए नोटिस जारी किए और कार्रवाई के नाम पर फाइलें बंद कर दी गईं। कई बार जमीन दलाल लोगों को सरकारी अनुमति बताकर गुमराह करते हैं। जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद लोग अपना मकान बनाने के लिए सरकारी अनुमति के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते हैं। अगर किसी ने बिना अनुमति मकान बना लिया तो मोटा जुर्माना वसूल किया जाता है।

छोटे – छोटे टुकड़ों में हो रहा नामांतरण…

अवैध प्लॉटिंग को शह देने में पटवारियों की भूमिका से इनकार नही किया जा सकता है। इसके बावजूद इन्हें अभयदान दे दिया जाता हैं। पटवारी छोटे – छोटे टुकड़ों में नामांतरण कर रहे हैं। इसकी जानकारी नगर निगम को नहीं देते। नगरीय निकाय के बाहर ग्रामीण क्षेत्र में भी पटवारी इसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को नहीं देते हैं। यही कारण है कि राजस्व विभाग के अधिकारी कार्रवाई नहीं कर पाते। बहरहाल अब देखना होगा कि न्यायधानी में यह अवैध कारोबार और कब तक जारी रहता है ? क्या शासन के हस्तक्षेप पर ही इस अवैध कारोबार पर बीच बीच में दिखावा कार्यवाही किया जाता रहेगा या इस मामले में कोई ठोस कार्यवाही प्रशासनिक नजीर बनेगी ?

Prachand Prahar

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