CBSE के नाम पर प्रवेश, ‘शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा विवाद ! निजी स्कूल पर गंभीर आरोप, शिक्षा विभाग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
टीसी रोकने, विशेष दुकान से कॉपी-किताब व ड्रेस खरीदने के दबाव और भ्रामक जानकारी देकर प्रवेश दिलाने के आरोपों की जांच शुरू

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर। जिले में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कुछ निजी विद्यालय स्वयं को सीबीएसई पैटर्न बताकर विद्यार्थियों का प्रवेश लेते हैं, लेकिन बाद में राज्य बोर्ड (सीजी बोर्ड) के तहत अध्ययन कराते हैं। साथ ही अभिभावकों पर विशेष दुकानों से कॉपी, किताब और ड्रेस खरीदने का दबाव भी बनाया जाता है। ताजा मामला राजेंद्र नगर स्थित महर्षि विद्या मंदिर (II) से जुड़ा है, जहां शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?
इमलीपारा निवासी विवेक लक्ष्मे ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी बेटियों का प्रवेश महर्षि विद्या मंदिर, राजेंद्र नगर में यह समझकर कराया कि विद्यालय सीबीएसई मान्यता प्राप्त है। उनका कहना है कि बाद में उन्हें जानकारी मिली कि विद्यालय सीजी बोर्ड से संचालित है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आर्थिक कठिनाइयों के कारण समय पर फीस जमा नहीं कर पाने पर उनके बच्चों को वार्षिक परीक्षा में शामिल नहीं किया गया, जिससे उनका पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हुआ। इसके बाद जब उन्होंने अन्य विद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) मांगा, तो स्कूल प्रबंधन ने कथित रूप से बकाया फीस जमा करने के बाद ही टीसी देने की बात कही।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत, शिक्षा विभाग सक्रिय
पीड़ित अभिभावक ने मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन और जिला प्रशासन से की। शिकायत के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक ने विद्यालय प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो कार्य दिवस के भीतर तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। साथ ही संकुल प्राचार्य एवं संकुल समन्वयक, राजेंद्र नगर को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष दुकान से खरीदारी कराने का भी आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि राज्य शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों पर विशेष दुकान से कॉपी, किताब और ड्रेस खरीदने का दबाव बनाता है। उल्लेखनीय है कि शासन पहले ही ऐसे निर्देश जारी कर चुका है कि किसी भी विद्यालय द्वारा किसी एक दुकान से सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य नहीं किया जा सकता।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने निजी स्कूलों की पारदर्शिता, मान्यता संबंधी जानकारी और अभिभावकों को दी जाने वाली सूचनाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल अभिभावकों के साथ विश्वासघात होगा, बल्कि शिक्षा संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला भी माना जा सकता है।
जांच जारी, अंतिम निर्णय शेष
फिलहाल मामले की जांच शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन हो सकेगा। विद्यालय प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क, बिलासपुर
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