September 10, 2026 |
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धोखा धोखा होता है, वजह चाहे कुछ भी हो… जिस क्षेत्र में सरकारी योजनाएं विधिवत लागू होती है, फिर अचानक वह क्षेत्र अवैध कब्जाधारी कैसे ? – महेश दुबे 

जब यह क्षेत्र अवैध था तो यहां विधिवत सरकारी कार्य कैसे और जब सरकारी कार्य विधिवत उक्त स्थल पर किए गए तो अवैध कब्जेधारी कैसे हुए ?

क्या वोट की राजनीति के चलते पहले बस्तियां बसाई जाएं, फिर मौका पाकर आम लोगों के लिए बनाई गई मूलभूत व्यवस्था उखाड़ फेंकी जाए ? – महेश दुबे

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। बिलासपुर के मेलापारा में पिछले चार दिनों से सरकार का बुलडोज़र चल रहा है और लोगो के मकान ख़ाली करवा कर तोड़े जा रहे है, जिसे लेकर कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमण्डल ने मेलापारा पहुँच कर कार्यवाही का विरोध भी किया गया था। कांग्रेस नेता महेश दुबे ने उक्त कार्यवाही पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि पार्षद विधायक सांसद निधियों से करोड़ों रुपए के कार्य सड़क, पानी, बिजली सहित मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार की सभी छोटी बड़ी योजनाएं जिस क्षेत्र में विधिवत लागू होती है और जनता को उसका फायदा पहुंचाया जाता है फिर अचानक वह क्षेत्र अवैध कब्जा धारी कैसे हो जाता है ? यह समझ से परे है !

यदि यह लोग अवैध कब्जाधारी थे तो शासन प्रशासन द्वारा सड़क, पानी, बिजली नाली सहित सामुदायिक भवन का निर्माण किस आधार पर किया जाता रहा है। पीढ़ी दर पीढ़ी वर्षों से काबिज लोगों को अचानक बेदखली कर सरकार द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित सड़क, बिजली के खंभे, सामुदायिक भवन, सुलभ शौचालय सब उखाड़ फेंका जाता है। जब यह अवैध था तो विधिवत सरकारी कार्य कैसे किए गए और जब सरकारी कार्य विधिवत उक्त स्थल पर किए गए तो अवैध कब्जे धारी कैसे हुए ?

बाप दादा परदादा के जमाने से रह रहे लोग जहां जन्मे है। उसे वह अपना मानते हैं और सपने में भी नहीं सोच सकते कि अचानक एक भूचाल की तरह उन्हें उक्त स्थान से बाहर फेंक दिया जाएगा ! क्या वोट की राजनीति के चलते पहले बस्तियां बसाई जाएं, जब बस्तियां पूर्ण रूप से विकसित हो जाएं और उसे स्थल की भूमि का मूल्य आसमान छूने लगे तो उन्हें उजाड़ कर फिर किसी मरुस्थल पर भेज दिया जाए ? जब अवैध है तो पार्षद विधायक सांसद निधि से कार्य उक्त क्षेत्र पर क्यों ? सरकारी योजनाएं अवैध स्थलों पर भी लागू हो सकती है नहीं तो फिर अवैध कब्जे धारी पर ही कार्रवाई क्यों ? उन पर भी कार्रवाई क्यों नहीं, जिन्होंने आंख मूंद कर ऐसे अवैध कब्जे धारी क्षेत्र पर शासन प्रशासन का करोड़ रुपए खर्च करने की स्वीकृति प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान की । पार्षद विधायक सांसद निधि ही क्यों ना हो शासन प्रशासन की दोहरी नीति का परिणाम करोड़ों अरबो रुपए की लागत से आम लोगों के लिए बनाई गई मूलभूत व्यवस्था उखाड़ फेंकी जाती है । वहीं दूसरी ओर वर्षों से रह रहे लोगों को अचानक सड़क पर निकाल फेक जाना मानवी अपराध है !

Prachand Prahar

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