‘आप’ की पूर्व विधानसभा प्रत्याशी डॉ. उज्वला कराड़े ने पार्टी से दिया इस्तीफा
क्या उनका यह फैसला AAP के लिए होगा एक बड़ा झटका ? क्या यह निर्णय पार्टी की रणनीति को करेगा प्रभावित ? क्या पार्टी की स्थानीय इकाई में खड़ा हो सकता है नेतृत्व का नया संकट ?

प्रचंड प्रहार/बिलासपुर।
क्या उनका यह फैसला AAP के लिए होगा एक बड़ा झटका ?
क्या यह निर्णय पार्टी की रणनीति को करेगा प्रभावित ?
क्या पार्टी की स्थानीय इकाई में खड़ा हो सकता है नेतृत्व का नया संकट ?
बिलासपुर। आम आदमी पार्टी (आप) की प्रमुख नेत्री डॉ. उज्वला कराड़े ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, जिसकी पुष्टि उन्होंने स्वयं की है। 2020 से AAP में सक्रिय रही डॉ. कराड़े ने बिलासपुर की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने समय-समय पर शहर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शन किए, नागरिकों को जागरूक किया और शहर की समस्याओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक आम जनता की आवाज उठाई।

डॉ. उज्वला कराड़े ने AAP में अपने सफर की शुरुआत बिलासपुर शहर अध्यक्ष के पद से की थी। उनके नेतृत्व में पार्टी ने शहर के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रियता दिखाई। उनके काम की सराहना करते हुए, पार्टी ने उन्हें *प्रदेश संयुक्त सचिव* के पद पर पदोन्नत किया। 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में, पार्टी ने डॉ. कराड़े को बिलासपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने इस चुनाव को पूरी मजबूती से लड़ा, नई जनता ने आप पर भरोसा नहीं किया परिणामस्वरूप उन्हें तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अमर अग्रवाल विजयी हुए, जबकि कांग्रेस के शैलेश पांडे दूसरे स्थान पर रहे।

अपने इस्तीफे के बारे में पूछे जाने पर डॉ. कराड़े ने कहा, “मैं अपने व्यक्तिगत कारणों के चलते पार्टी को पर्याप्त समय नहीं दे पा रही हूं। इसलिए मैं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अन्य सभी पदों से इस्तीफा दे रही हूं। “उनके इस फैसले ने बिलासपुर की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनका ये फैसला AAP के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि डॉ. कराड़े की पहचान एक संघर्षशील और समर्पित नेता के रूप में रही है। उनके इस्तीफे के बाद, पार्टी की स्थानीय इकाई में नेतृत्व का नया संकट खड़ा हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी नगरीय निकाय चुनावों के मद्देनज़र डॉ. कराड़े का यह निर्णय पार्टी की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP इस स्थिति से कैसे निपटती है और नए नेतृत्व की दिशा में क्या कदम उठाती है।



