October 25, 2026 |
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सरकारी जमीन एवं रहवासी इलाकों में रेत और गिट्टी का अवैध भंडारण, प्रतिबंधित समय में भवन निर्माण सामग्री का परिवहन, क्या प्रशासनिक अमले की मौन सहमति ? पढ़िए पूरी खबर…

प्रचंड प्रहार न्यूज/नेटवर्क, बिलासपुर । सरकारी जमीन एवं रहवासी इलाकों में रेत, गिट्टी के पहाड़ नजर आ रहे हैं। जिन्हें मंहगें दरों पर बेचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। अवैध रूप से बने रेत और गिट्टी के पहाड़ को देखकर लगता हैं कि ऐसे कारोबारियों पर नकेल कसने में प्रशासनिक अमला फिसड्डी साबित हो रहा है । एक तरफ जहां अवैध रूप से रेत उत्खनन जोरो पर है वहीं शहर एवं आसपास के इलाकों में अवैध रूप से रेत, गिट्टी के भंडारण का कारोबार भी जमकर फल-फूल रहा है और साथ ही प्रतिबंधित समय में धड़ल्ले से इनका परिवहन भी किया जा रहा है। जिसके खिलाफ प्रशासन की ओर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं किया जाना, प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठा रहा हैं।

हाईकोर्ट भी दे चुका है निर्देश

हाईकोर्ट ने बहुत पहले स्पष्ट किया है कि रेत खनन, भंडारण और परिवहन करने वालों को सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने कई बार इस बाबत शासन-प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो स्थिति बदली है और न ही प्रशासनिक सख्ती दिखी है। अब पहले की तरह रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि दिनदहाड़े खुलेआम उत्खनन भंडारण, बिक्री और परिवहन किया जाता हैं। रेत माफियाओं की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता ने शहर के हालात बद से बदतर कर दिए हैं।

नियमों का खुलेआम उल्लंघन…

विदित हो कि शासन के तय नियमों के मुताबिक किसी भी प्रकार से खनिज भंडारण के लिए खनिज, राजस्व, पंचायत, पुलिस और पर्यावरण विभाग जिम्मेदार होता हैं। खनिज भंडारण को लेकर शासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं । इसके बाद भी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। जबकि नियमानुसार किसी भी प्रकार के खनिज डंप (भंडारण) करने का लायसेंस खनिज विभाग जारी करता हैं और इसकी इजाज़त रहवासी क्षेत्रों में नहीं दी जाती हैं। रेत/गिट्टी भंडारण में सरकार के नियमों का पालन करना अति आवश्यक हैं। रेत एवं गिट्टी भंडारण की लायसेंस प्रकिया में शासन के द्वारा निश्चित राशि जमा कराकर लायसेंस प्रदान किया जाता हैं। लेकिन बिलासपुर में बिना लायसेंस रेत, गिट्टी का भंडारण करके शासन के लाखों रुपए के राजस्व हानि का खेल खेला जा रहा हैं।

अवैध भंडारण को क्या विभाग की मौन सहमति ?

उल्लेखनीय हैं की शहर के अन्दर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित हैं, लेकिन रेती और गिट्टी के डम्पर/हाइवा को खुलेआम मोहल्लों, कालोनियों और सरकारी जमीनों पर अवैध तरीक़े से ख़ाली कराया जा रहा हैं और साथ ही महंगे दरों पर बेचा जा रहा है। जिससे यह संदेह होना लाज़िमी है कि, “क्या रेती या गिट्टी से भरे डंपर/हाईवा को नो एंट्री में ख़ाली कराने में पुलिस और खनिज विभाग की मौन सहमति है ? और क्या इसी वजह से बिना किसी डर के बेखौफ होकर लगातार खनिज का भंडारण और बिक्री का कार्य किया जा रहा है।

खनिज विभाग से स्टॉक लाइसेंस लेना अनिवार्य…

गौरतलब है कि रेत एवं गिट्टी के भंडारण हेतु अनुमति (Stock License) स्टॉक लाइसेंस खनिज विभाग से लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति रेत/गिट्टी का भंडारण गैरकानूनी है और उस पर ज़ब्ती एवं जुर्माने का प्रावधान है। लाइसेंस लेने के लिए खनिज विभाग को आवेदन, आवश्यक शुल्क और स्थल का नक्शा प्रस्तुत करना अनिवार्य है। स्थल का चयन खनिज विभाग/स्थानीय प्रशासन (नगर निगम/नगर पालिका/ग्राम पंचायत) द्वारा स्थल का निरीक्षण और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया जाना अनिवार्य है।

रहवासी क्षेत्र में भंडारण प्रतिबंधित, यातायात बाधित होने के साथ दुर्घटना का खतरा…

रहवासी क्षेत्रों, विद्यालय, अस्पताल और घनी आबादी वाले इलाकों में रेत-गिट्टी का भंडारण की अनुमति नहीं दी जाती हैं। क्योंकि धूल प्रदूषण ट्रक/डंपर/हाईवा के आवाजाही से यातायात बाधित होने के साथ दुर्घटना का खतरा रहता हैं। माइनिंग रूल्स” (प्रदेशीय खनिज नियमावली) और “पर्यावरण संरक्षण अधिनियम” के प्रावधान लागू होते हैं। नगर निगम/नगर पालिका के ज़ोनिंग उपविधियों में भी रहवासी क्षेत्र में भंडारण प्रतिबंधित है। केवल औद्योगिक क्षेत्र या विभाग द्वारा स्वीकृत ओपन यार्ड में ही स्टॉक यार्ड की अनुमति देना अनिवार्य है। बिना अनुमति रहवासी क्षेत्र में भंडारण करने पर खनिज विभाग जब्ती कर सकता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि बिना अनुमति खनिजों के खनन, भंडारण और परिवहन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर मिशाल पेश की जाएगी या इन अवैध कारोबारियों पर प्रशासनिक अधिकारियों की दया दृष्टि बनी रहेगी ?

क्रमशः

Prachand Prahar

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