पत्रकार अशोक व्यास की 13 वीं पुस्तक दोष मिटाएं, भाग्य जगाएं लांच
उनकी पत्नी श्रीमती बबीता व्यास ने उन्हें प्रेरित किया कि एक पत्रकार होने के नाते समाज में लेखन के माध्यम से जागृति लाने प्रयास जरूर करें।

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। हमारे जीवन में कुंडली में बने दोष हमारे भाग्य को बाधित कर देते हैं। जब इन दोषों को कुछ खास उपायों से कम किया जाता है तो हमारे कर्म के साथ भाग्य का सम्बंध बन जाता है और हमारे काम बनने लगते हैं। इन दोषों को दूर करके हम कम प्रयासों में ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अशोक व्यास का।

उन्होंने यह बात गुरुवार को उनकी 13 वीं पुस्तक ‘ दोष मिटाएं, भाग्य जगाएं ‘ के विमोचन अवसर पर कही। उन्होंने बताया कि लगभग 132 पेज की इस पुस्तक में इन दोषों को दूर करने के बेहद सरल उपाए बताए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुस्तकें लिखने का उद्देश्य यही है कि हम समाज में जागृति ला सकें। महत्वपूर्ण यह नहीं कि कितने लोग इसे पढ़ते हैं बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि कितने अधिक लोग इसके माध्यम से लाभ उठा सकते हैं।
पत्रकार होने के नाते समाज में लेखन के माध्यम से जागृति लाने प्रयास जरूर करें।
कुंडली के दोष दूर करके कर्म और भाग्य के संगम से जिंदगी की दिशा को बदला जा सकता है। अशोक ने बताया कि उनकी पत्नी श्रीमती बबीता व्यास ने उन्हें प्रेरित किया कि एक पत्रकार होने के नाते समाज में लेखन के माध्यम से जागृति लाने प्रयास जरूर करें। यही वजह है कि आज वे 13 पुस्तकें लिख सके। इसके पहले श्री व्यास कविताओं की पुस्तक साक्षी, साक्षी-2 और साक्षी-3, साक्षी-4, साक्षी-5, साक्षी-6 तथा ज्योतिष पर पुस्तक’ समस्याएं आपकी समाधान हमारे’ ‘समस्त व्रत पूजा विधान ‘ पुस्तक के अलावा ‘सत्यनारायण व्रत कथा’ और ‘मंत्र बोलते हैं भाग्य खोलते हैं’, पुस्तक ‘मुहूर्त हाथ में सफलता साथ में’ पुस्तक लिख चुके हैं।

पुस्तक ‘ दोष मिटाएं, भाग्य जगाएं ‘ का विमोचन बुक्स क्लिनिक के भवन कुदुदंड में गुरुवार 26 जून को हुआ। इस मौके पर बुक्स क्लीनिक के डायरेक्टर हितेश सिंह बिसेन,को- डायरेक्ट ऋचा सिंह बिसेन,अनिका सिंह बिसेन, श्रीमती बबीता व्यास, साक्षी व्यास, राजेश कुमार बंजारे, रजनी केशरवानी, आर्यन धीवर, सतीश राजपूत, दिव्या सिन्घ्रौल, लव थवाईत, आशीष कुमार धुरी, पूर्णिमा श्रीवास, पल्लवी पाण्डेय, दुर्गा यादव, कल्याणी सिंह, आयुष सिंह, अनुज प्रताप सिंह जन्मेजय पैकरा के अलावा बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।



