
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर। बिलासपुर जिले का आदिवासी विकास विभाग इन दिनों लगातार सुर्खियों में है, निविदा में भ्रष्टाचार हो या आय से अधिक संपत्ति की शिकायत हो एक के बाद एक मामले विभाग के सामने आते जा रहे हैं, पूर्व में भी यहां के सहायक आयुक्त के ऊपर एफ आई आर दर्ज किया गया था जो अभी ACB में जांच प्रक्रिया में हैं, इसी कड़ी में एक बड़ा मामला सामने आ रहा है।

यहां पदस्थ पवन शर्मा जिनकी अनुशंसा सेवानिवृत्त हेतु कई वर्षों पूर्व की जा चुकी हैं लेकिन इसके बाद भी अब तक इनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है, बताते चले कि पचास वर्षों की आयु व 20 वर्षों की सेवा अवधि पूर्ण किए जाने के नियम के तहत पवन शर्मा की अनुशंसा कलेक्टर ने आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग इंद्रावती भवन अटल नगर नया रायपुर में आयुक्त को इसकी अनुशंसा की थी लेकिन इनके अनुशंसा के बावजूद भी आज तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं जा रही है, विभाग के आयुक्त के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं करना किसी बड़े अधिकारियों व नेताओं का साठगांठ होना प्रतीत हो रहा है, बताते चले कि पवन शर्मा लगातार तीस सालों से जिला बिलासपुर में पदस्थ रहे हैं इनके खिलाफ कई शिकायतें व एफ आई आर दर्ज भी कराया गया था ।
बताते चले कि इन सभी आदेशों को लेकर श्री दिलीप लहरिया जी के द्वारा प्रश्नकाल में यह मामले को 2025 में प्रमुखता से उठाया था लेकिन इसके बाद भी छत्तीसगढ़ राज्य में जहां खुद सी एम आदिवासी समाज से आते हैं, उन्हीं के शासन काल में उन्हीं के विभाग में एक बाबू इतना बड़ा रणनीतिकार बनकर पूरे विभाग को चला रहा है यह बेहद चिंतन का विषय है, अब देखने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में बिलासपुर जिले के कलेक्टर व आदिवासी विकास विभाग के आयुक्त व जनप्रतिनिधि क्या कार्यवाही करते हैं,



