वर्दी की गरिमा हुई तार- तार, नशे की तलब में मर्यादा भूल गए वनपाल, विभागीय भ्रष्टाचार की खुली पोल, विभाग ने वनपाल को थमाया नोटिस

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की तमाम कोशिशें फैल होती नज़र आ रही है । सरकारी दावों की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वन विभाग के भ्रष्ट अधिकारी भ्रष्टाचार को अंजाम देकर गुपचुप तरीके से अपनी जेब भर रहे है। इसका खुलासा खुद वनपाल ने किया है। जिसका वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो मीडिया के हाथ लग जाने पर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

नशे के आगोश में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार पर चर्चा
इस वीडियो में एक वनपाल वर्दी की मर्यादा को ताक में रख, केवल नशे की तलब को पूरा करने पूरी तन्मयता से जुटा हुआ नजर आ रहे है जो वर्दी की गरिमा को तार- तार तो कर ही रहे है, साथ ही विभाग में चल रही कथित कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के अलावा अपने उच्च अधिकारियों के क्रियाकलापों पर चौकीदार के साथ गांजा का कस लगाते गहन चिंतन और चर्चा में डूबा नजर आ रहे है। बताया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहे वनपाल का नाम चंदन सिंह हैं। जो कि रतनपुर क्षेत्र में पदस्थ बताया जा रहा है। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि वनपाल चंदन सिंह, चौकीदार और कुछ लोगों के साथ वर्दी की गरिमा को कैसे धूमिल कर रहे है। हाथ में गांजा और चिलम लेकर खुद गांजा बनाकर खुद कश लगाते हुए चौकीदार को भी पिला रहे है। वीडियो में आप सुन सकते है कि वनपाल चंदन सिंह वन विभाग के भ्रष्टाचार पर भी खुलकर चर्चा कर रहे है।
एक साइन में 20 प्रतिशत कमीशन ?
नशे के दौरान वनपाल के साथ चौकीदार बातचीत में “एक साइन में 20 प्रतिशत कमीशन जैसी बाते कर विभाग के भ्रष्टाचार की गाथा बताकर वनपाल से हामी भरवा रहे है। जिससे यह संकेत मिलता है कि विभागीय कार्यों में बड़े स्तर पर कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। यह दृश्य न केवल कानून और सेवा नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि वर्दी की गरिमा को भी गहरी ठेस पहुंचाता हैं।
क्या उच्चाधिकारियों तक पहुंचेगी जांच की आंच ?
इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग के अधिकारियों ने वनपाल को नोटिस थमा दिया है। यह लगभग तय माना जा रहा हैं कि वनपाल चंदन सिंह पर विभागीय कार्रवाई होगी । लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल निचले स्तर पर कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा ? या उन उच्चाधिकारियों तक भी जांच की आंच पहुंचेगी जिनके खिलाफ 20 प्रतिशत कमीशनखोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं। अब सबकी नजरे वन विभाग के उच्चाधिकारियों और सुशासन सरकार की कार्रवाई पर टिकी हुई है।



