October 28, 2026 |
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नियमितीकरण योजना अटकी, 4500 से अधिक फाइलें पेंडिंग, जवाब के लिए भटक रही जनता – अंकित गौरहा

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर । शहर में बिना नक्शा पास मकानों के नियमितीकरण के लिए शुरू की गई प्रदेश सरकार की योजना अब ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है। करीब तीन साल पहले लागू इस योजना के तहत शहर के हजारों लोगों ने इंजीनियरों के माध्यम से 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च कर नक्शे तैयार करवाए और फाइलें नगर निगम के जोन कार्यालयों में जमा की थीं। हालांकि, प्रारंभिक स्तर पर फाइलों की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अधिकांश आवेदन नगर निगम की भवन शाखा से होते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग तक पहुंच गए, लेकिन उसके बाद से प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी है।

4500 से अधिक आवेदन लंबित

नगर निगम बिलासपुर में वर्तमान में नियमितीकरण के लगभग 4,500 से अधिक आवेदन लंबित हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि सभी फाइलें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को भेज दी गई हैं, लेकिन वहां से आगे की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी की बैठकें नियमित रूप से नहीं होने के कारण इन मामलों का निराकरण अटका हुआ है। इस विषय में जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट जानकारी देने से बचते नजर आ रहे हैं।

खर्च के बाद भी नहीं मिल रहा लाभ

योजना के तहत लोगों ने अपनी जमा पूंजी खर्च कर फाइलें तैयार कराईं, लेकिन अब उन्हें न तो प्रक्रिया की स्पष्ट स्थिति बताई जा रही है और न ही कोई निश्चित समय सीमा दी जा रही है। कई आवेदकों का कहना है कि यदि दोबारा आवेदन या नियमों में बदलाव की बात होती है, तो यह उनके साथ अन्याय होगा।

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने उठाए सवाल

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सरकार की योजना के तहत लोगों से हजारों रुपये खर्च करवाने के बाद प्रक्रिया को बीच में रोक देना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने मांग की है कि लंबित सभी आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लेते हुए नियमितीकरण प्रक्रिया को पुनः प्रारंभ किया जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।

निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कार्यालयों के चक्कर

लंबित आवेदनों के कारण आवेदक लगातार नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। हर बार अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं—कहीं प्रक्रिया बंद होने की बात कही जाती है, तो कहीं नियमों में बदलाव का हवाला दिया जाता है। इससे आम नागरिकों में असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

प्रदेश के अन्य शहरों में भी समान स्थिति

यह समस्या केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में भी नियमितीकरण की प्रक्रिया धीमी या ठप बताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में की गई थी, जिसका उद्देश्य अवैध निर्माणों को वैध कर नागरिकों को राहत देना था।

फैसले का इंतजार

वर्तमान स्थिति में हजारों आवेदक इस उम्मीद में हैं कि शासन और प्रशासन जल्द ही इस प्रक्रिया को पुनः शुरू कर लंबित मामलों का निराकरण करेंगे। जब तक स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक लोगों की परेशानी और अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है।

Prachand Prahar

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