April 17, 2026 |
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30 लाख का भत्ता, 200 संशोधन और अनुकंपा में खेल, शिक्षा विभाग में संगठित घोटाले का आरोप 

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर । जिला शिक्षा विभाग पर गंभीर और बहुस्तरीय भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं । युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अंकित गौरहा ने प्रदेश के प्रमुख सचिव से मुलाकात कर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और स्थापना शाखा के जूनियर ऑडिटर सुनील यादव के खिलाफ विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में वित्तीय गबन,अनुकंपा नियुक्ति में फर्जीवाड़ा,युक्तियुक्तकरण में नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक प्रक्रिया को दरकिनार कर फैसले लेने जैसे कई गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं।

वर्दी धुलाई,भत्तों के नाम पर 30 लाख का भुगतान

अंकित गौरहा के अनुसार, कोटा विकासखंड में पदस्थ रहते हुए विजय टांडे ने सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच विभाग के एक कर्मचारी देवेंद्र कुमार फाल्के को कर्मचारी कोड के माध्यम से सीधे लगभग 30 लाख रुपए का भुगतान किया। यह राशि “अन्य भत्ता” और “वर्दी धुलाई भत्ता” के नाम पर दी गई। आरोप है कि हर महीने लगभग 4 से 4.5 लाख रुपए तक एक ही कर्मचारी को दिए गए, जो सामान्य वेतन ढांचे से कई गुना अधिक है। सवाल उठाया गया है कि इतनी बड़ी राशि का आहरण और वितरण बिना मिलीभगत के संभव नहीं है।

आहरण संवितरण अधिकारी की भूमिका पर सवाल

शिकायत में कहा गया है कि उस समय विजय टांडे ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी कोटा के साथ-साथ आहरण एवं संवितरण अधिकारी भी थे, इसलिए यह पूरा भुगतान उनकी जानकारी और अनुमति से हुआ। अंकित गौरहा ने मांग की है कि संबंधित कर्मचारी और अधिकारी के बीच खातों के लेन-देन की विस्तृत जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक आर्थिक लाभ और षड्यंत्र का खुलासा हो सके।

कलेक्टर के निर्देश के बावजूद कार्रवाई नहीं

मामले को कलेक्टर बिलासपुर की समय-सीमा बैठकों में उठाया गया और कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। बाद में थाना कोटा में अपराध दर्ज हुआ,लेकिन इसके बावजूद विजय टांडे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत में इसे प्रशासनिक उदासीनता बताया गया है।

कारनामे छिपाने के लिए अधीनस्थों को निलंबित

अंकित गौरहा ने आरोप लगाया है कि अपने कार्यकाल की अनियमितताओं को छिपाने के लिए विजय टांडे ने संबंधित क्लर्क और भृत्य को निलंबित कर दिया,जबकि वास्तविक जिम्मेदारी उन्हीं की थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिला शिक्षा कार्यालय के कुछ अन्य कर्मचारी भी इस पूरे प्रकरण में शामिल हैं।

मासिक व्यय पत्रक और बजट में हेरफेर”

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि जिला शिक्षा कार्यालय में जमा होने वाले मासिक व्यय पत्रक और बजट दस्तावेजों में गड़बड़ी कर गबन की राशि को छुपाया गया। हस्ताक्षरयुक्त हार्ड कॉपी जमा होने के बावजूद वास्तविक वित्तीय स्थिति अलग रखी गई।

पुराने मामलों में भी कार्रवाई नहीं, उल्टा पदोन्नति”

अंकित गौरहा ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। पूर्व में सहायक ग्रेड-2 राजेश कुमार प्रताप के मामले में कार्रवाई हुई, लेकिन उसी प्रकरण में विजय टांडे पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, दिवंगत शिक्षक पुष्कर भारद्वाज की पत्नी नीलम भारद्वाज द्वारा रिश्वत मांगने की शपथ-पत्र सहित शिकायत की गई थी,जो जांच में सही पाई गई। संबंधित बाबू को निलंबित किया गया,लेकिन विजय टांडे के खिलाफ जांच की अनुशंसा के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और बाद में उन्हें प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया।

नियुक्ति में नियमों की धज्जियां, अपात्रों को लाभ

शिकायत में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि पात्र परिजनों की जगह अन्य लोगों को नियुक्ति दी गई। इस प्रक्रिया में नियमों की खुलेआम अनदेखी हुई और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया। इसमें सुनील यादव की भूमिका को भी अहम बताया गया है।

200 प्रकरणों में संशोधन,समितियों को दरकिनार”

युक्तियुक्तिकरण प्रक्रिया में भी भारी अनियमितता का आरोप है। जिला स्तरीय और विकासखंड स्तरीय समितियों के अनुमोदन के बिना ही करीब 200 शिक्षक प्रकरणों में संशोधन किए गए। आदेशों में न तो हस्ताक्षर हैं, न नोटशीट और न ही संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई। कई मामलों में न्यायालय के निर्देश का हवाला दिया गया, जबकि अधिकांश संशोधन गोपनीय तरीके से किए गए और बाद में शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण कराया गया।

क्या समितियां सिर्फ कागजों में ?

अंकित गौरहा ने सवाल उठाया है कि जब समितियां अस्तित्व में हैं,तो उनके बिना निर्णय कैसे लिए जा रहे हैं या फिर उन्हें पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया है। शिकायत में इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र बताया गया है,जिसमें विजय टांडे और उनके करीबी सुनील यादव की केंद्रीय भूमिका है।

जांच प्रभावित होने की आशंका, निलंबन की मांग

शिकायत में यह भी कहा गया है कि विजय टांडे के खिलाफ पहले से कई मामलों की जांच चल रही है, जिन्हें पद पर रहते हुए प्रभावित किया जा सकता है। इसलिए उन्हें तत्काल निलंबित कर स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की गई है। सुनील यादव के खिलाफ भी साक्ष्य सहित शिकायत सौंपी गई है।

Prachand Prahar

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