टुकड़ों में रजिस्ट्री हो गई, नामांतरण हो गया, कार्यवाही केवल पन्नो में सिमटकर रह गई
विवादित जमीन खरीदकर प्लाटिंग करने वाले भूमाफियों के आगे नगर निगम का पत्र पड़ा फीका

बिलासपुर। अवैध प्लाटिंग का हंगामा छत्तीसगढ़ की न्यायधानी से लेकर विधानसभा तक गूंजा। हो हंगामें के बाद कई कार्यवाही भी हुई लेकिन वास्तविकता कुछ और ही बयां कर रही। घुरू पटवारी हल्का नंबर 61 अंतर्गत यदुनंदन नगर के खसरा क्रमांक 304/1 एवं 304/2 भूस्वामी रमनदीप सलूजा तथा अजीत पटेल अन्य की भूमि के पंजीकरण रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक लगाने का पत्र नगर निगम ने जिला पंजीयक, तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों को जारी किया।

जिसके बाद भी नगर निगम के पत्र को नजर अंदाज किया गया। दोनों खसरा की इस जमीन का टुकड़ों में रजिस्ट्री होता रहा और नामांतरण भी होता रहा। अब सवाल यह उठता है कि नगर निगम ने इस खसरों की भूमि को अवैध प्लाटिंग के रूप में चिन्हांकित किया है, संबंधित अधिकारियों को रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक लगाने का पत्र भी जारी किया। तो फिर इन खसरों का टुकड़ों में कैसे रजिस्ट्री और नामांतरण हो गया?

तिफरा यदुनंदन नगर स्थित साईं विहार कालोनी वासियों सहित पार्षद ने यदुनंदन नगर में हो रहे अवैध प्लाटिंग की लिखित शिकायत कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक की है फिर भी खसरा क्रमांक 304/1,304/2 का टुकड़ों में रजिस्ट्री होता रहा।
धरसा को लेकर सीमांकन विवाद
ग्राम घुरू खसरा प.ह.न 61 स्थित खसरा क्रमांक 304/2 रकबा 0.304 हेक्टर भूमि में अवैध प्लाटिंग के बाद बचत रकबा 0.1786 हेक्टेयर है। सूत्र की माने तो इस खसरा के पूर्व भूस्वामी ने कम रकबा की जानकारी देकर रमनदीप सलूजा और अजित पटेल को जमीन बेची है। इसी कारण रमनदीप सलूजा को जमीन का सीमांकन कराना पड़ा। बताया जा रहा है रमनदीप सलूजा ने इस जमीन पर अवैध प्लाटिंग कर रखी है।

सीमांकन प्रतिवेदन में भिन्नता
पूर्व के सीमांकन प्रतिवेदन में सांई विहार कालोनी के केवल गार्ड रूम और सड़क को रमनदीप सलूजा की निजी भूमि में होना बताया गया लेकिन अब उसी गार्ड रूम और सड़क को शासकीय भूमि में होना बताया गया है।
नगर निगम का ले आउट नक्शा कुछ और कह रहा
बता दे कि सांई विहार कालोनी के नक्शा ले आउट नगर निगम से प्रस्तावित है। नगर निगम बिना मौका के नक्शा पास नही करता है फिर क्या मौके का बिना मुआयना किए ही अधिकारियों ने नक्शा पास कर दिया? अगर खसरा क्रमांक 193 की शासकीय भूमि के अंशभाग में साईं विहार का कालोनी का गार्ड रूम और सड़क बना है तो फिर नगर निगम से नक्शा पास कैसे हो गया? यही नही पूर्व के सीमांकन प्रतिवेदन को जिस अधिकारी ने बनाया है उन्होंने रमनदीप सलूजा की भूमि पर गार्ड रूम और सड़क का होना बताया है तो क्या उन्होंने जान बूझकर गलत प्रतिवेदन बनाया है?

खसरा नंबर 194 और 195 में बने मकान को बता रहे शासकीय भूमि
सकरी तहसील अंतर्गत प.ह.न 61 खसरा क्रमांक 304/2 भूस्वामी रमनदीप सलूजा ने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट से सीमांकन आदेश कराया है। जिसके बाद राजस्व अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश के परिपालन में कम रकबा की विवादित जमीन खरीदी करने वाले भूस्वामी रमनदीप सलूजा की जमीन का सीमांकन किया और खसरा क्रमांक 194 और 195 में बने 6 मकान को शासकीय भूमि दर्शाकर शासकीय भूमि में प्लाटिंग करने वाले को क्लीन चीट दिलवा दिया। इस सीमांकन को लेकर राजस्व अधिकारी कर्मचारियों पर बड़े रिश्वतख़ोरी लेनदेन का आरोप लग रहा है। जिसका खामियाजा वर्षों से पक्का मकान बनाकर बतौर नक्शा भू अनुज्ञा के साथ काबिज़ 6 मकान वाले भूस्वामियों को भुगतना पड़ रहा है। राजस्व अधिकारियों ने आखिर जब सीमांकन किया तो खसरा क्रमांक 194 और 195 की कुल रकबा भूमि को चिन्हांकित क्यों नहीं किया? क्या भू राजस्व संहिता के विधि में सीमांकन करते समय अगर दीगर खसरा में कोई काबिज़ मिलता है तो उस भूस्वामी की भूमि को चिन्हांकित नही किया जाता? अगर ऐसे सीमांकन होगा तो आज इसको न्यायालय जाना पड़ेगा कल उसको न्यायालय जाना पड़ेगा।फायदा केवल राजस्व अधिकारियों का होता रहेगा।

चोरी अब किसी से छिपी नहीं
राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों की चोरी अब किसी से छिपी नहीं है। किस काम का कितना पैसा लेते है हर कोई जानता है। खासकर जब विवादित जमीन के सीमांकन प्रकरण हो तो मानो इनके पांचों उंगली घी में रहते है। दोनों तरफ से फायदा ही फायदा होता है। इस मामले में भी राजस्व अधिकारियों के द्वारा बड़ा लेनदेन करके गलत सीमांकन करना बताया जा रहा है । मतलब हाईकोर्ट के आदेश का परिपालन भी हो गया और इधर वन टू का फोर भी हो गया ?
क्रमशः



