April 24, 2026 |
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अपोलो हॉस्पिटल की विश्वसनीयता पर प्रश्न, लगातार रहा विवादों से नाता, कांग्रेसजनों ने अपोलो के खिलाफ छेड़ी मुहिम, ताकि भविष्य में न हो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति

बिलासपुर। अपोलो के पूर्व फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जान केम के पकड़े जाने के बाद बिलासपुर में भी कांग्रेसजनों ने अपोलो हॉस्पिटल के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशरवानी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने 8 अप्रैल को अपोलो हॉस्पिटल के यूनिट हेड अर्णव राहा से मुलाकात की, प्रतिनिधि मण्डल में ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशरवानी, मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया,पूर्व विधायक श्रीमती रश्मि आशीष सिंह,पूर्व विधायक सियाराम कौशिक, पूर्व प्रत्याशी राजेन्द्र साहू, प्रवक्ता ऋषि पांडेय, ब्लॉक अध्यक्ष आदित्य दीक्षित शामिल रहे।

प्रतिनिधि मंडल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि उन्होंने अपोलो प्रबन्धन से लिखित में जवाब मांगा है जिसमे प्रबन्धन ने कुछ समय के लिए जवाब देने की बात की है। ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कहा कि हॉस्पिटल विश्वास का मंदिर होता है, जहां मरीज के परिजन अपना सब कुछ लुटा देता है, पर जब उसे पता चलता है कि इलाज एक फर्जी धारी डॉक्टर ने किया है ? ऐसे में अपोलो हॉस्पिटल की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठता है ? विजय केशरवानी ने कहा कि बिलासपुर अपोलो हॉस्पिटल खुला तो माना जा रहा था कि बिलासपुर भी स्वास्थ्य सुविधा में आगे बढ़ रहा पर अपोलो लगातार विवाद में रहा है, अधिक बिलिंग हो, छोटी छोटी बीमारी में मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो प्रबन्धन का व्यवहार हो उसके बाद भी जनता स्वास्थ्य के नाम पर सब कुछ स्वीकार कर लेता था । किंतु फर्जी डॉक्टर की नियुक्ति अस्वीकार है इसके लिए आगे की लड़ाई लड़ी जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो ।

विजय केशरवानी ने मांग की है कि अपोलो में जितने भी डॉक्टर कार्यरत है, उनकी डिग्री की फोटो कॉपी सात दिवस के अंदर उनके चेम्बर के सामने चस्पा कर के रखे ताकि मरीज इलाज के पहले सन्तुष्ट हो जाये कि उसका इलाज एक काबिल डॉक्टर कर रहा है।

कांग्रेस ने की फर्जी डॉक्टर नरेंद्र जान केम के संदर्भ में मांग

✍️ 1. वह कब से कब तक अपोलो में कार्यरत रहा?

✍️ 2. इस बीच कितना ऑपरेशन किया ,उन मरीजो में कितना जीवित है?

 ✍️ 3. नियुक्ति के पहले उसकी डिग्री की जांच किस समिति ने की, उस समिति में कौन कौन डॉक्टर और प्रबन्धन के लोग शामिल थे?

✍️ 4. उसकी डिग्री का पंजीयन नेशनल मेडिकल कौंसिल में है कि नही?

✍️ 5. उक्त फर्जी डॉक्टर ने इस्तीफा दिया कि प्रबन्धन ने बर्खास्त किया? 

✍️ 6. प्रबन्धन ने उक्त डॉक्टर को बर्खास्त किया तो किस आधार पर किया ? 

जैसे सवालो के जवाब प्रबन्धन से लिखित में मांग की है, प्रबन्धन जवाब नही देगा तो आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

Prachand Prahar

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