July 27, 2026 |
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छत्तीसगढ़देशबिलासपुरमोदी की विकास यात्रा

नव वर्ष और ऊर्जा सशक्तिकरण का नया अध्याय, ऊर्जा क्षेत्र के विकास और उन्नयन के लिए प्रधानमंत्री कर रहे ‘स्वर्णिम भविष्य’ का ‘शिलान्यास’

विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने ऊर्जागढ़ के तौर पर छत्तीसगढ़ की भागीदारी मजबूत 

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नव वर्ष के अवसर पर छ्त्तीसगढ़ प्रवास पर आ रहे हैं। वे अनेक जनकल्याणकारी कार्यों का लोकार्पण करने के साथ ही योजनाओं के लाभार्थियों को चेक और चाबी भी सौंपेंगे। इन सबके बीच वे छत्तीसगढ़ के समग्र विकास के आधार को मजबूत करने जा रहे हैं। शक्ति आराधना के पर्व नवरात्रि के अवसर पर वे प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में विकास के नए युग की शुरूआत करेंगे।

छत्तीसगढ़ को विद्युतगढ़ बनाए रखने के लिए जहाँ दो बड़े बिजली संयंत्रों के निर्माण कार्य का शुभारंभ करेंगे वहीं तेल, गैस/रेल सड़क शिक्षा और आवास जैसे क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास का नया अध्याय लिखने जा रहे हैं । प्रधानमंत्री की विकसित भारत की संकल्पना में ऊर्जा पहली आवश्यकता है और मुख्यमंत्री के तौर पर श्री विष्णुदेव साय ने इस संकल्पना को साकार करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र को प्राथमिकता में रखते हुए उत्पादन के नए प्रतिमान स्थापित करने का निर्णय लिया है।

पॉवर कंपनी का पहला सुपर क्रिटिकल संयंत्र

छत्तीसगढ़ ऊर्जा में आत्मनिर्भर होने के साथ ही देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भागीदारी निभा रहा है। आज प्रदेश की विदयुत उत्पादन क्षमता 30 हजार मेगावॉट हो चुकी है जिसे आने वाले एक दशक में 60 हजार मेगावॉट तक ले जाने का लक्ष्य है, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कोरबा में बनने जा रहा 1320 मेगावॉट का उत्पादन संयंत्र। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी की 660 मेगावॉट क्षमता की दो इकाइयों वाले इस पहले सुपर क्रिटिकल थर्मल प्लांट के निर्माण कार्यों का प्रधानमंत्री शुभारंभ करेंगे वहीं एनटीपीसी की सीपत ताप विदयुत गृह में 800 मेगावॉट क्षमता की पहले अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पॉवर प्लांट का शिलान्यास भी करेंगे। ऊर्जा उत्पादन के साथ इसके निर्बाध पारेषण को सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम क्षेत्र विस्तार योजना के तहत पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन की तीन ट्रांसमिशन परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे।

प्रदेश में ताप विद्युत संयंत्रों का अमृतवर्ष

प्रधानमंत्री मोदी, देश के अमृतकाल में ऊर्जा को प्राथमिकता प्रदान करते हुए स्वयं लगातार प्रयास कर रहे हैं, यह संयोग है कि 75 वर्ष पूर्व प्रदेश में पहला बड़ा ताप विद्युत संयंत्र स्थापित हुआ। रायपुर के गुढ़ियारी में 4 मेगावॉट के इस संयंत्र का लोकार्पण मध्यभारत प्रांत के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने 15 अगस्त 1951 को किया। यहाँ से जो सिलसिला शुरू हुआ उसमें एक बड़ा पड़ाव आया 25 जून 1957 को । संयुक्त मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.डॉ कैलाशनाथ काटजू ने मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के लिए तत्कालीन बिलासपुर जिले के कटघोरा क्षेत्र के छोटे से गाँव कोरबा में 30 मेगावॉट के तीन और 10 मेगावॉट क्षमता की एक इकाई वाले पहले विद्युत गृह के शिलान्यास का पत्थर रखा। इसके बाद सिलसिला चल पड़ा, बाद में 50 मेगावॉट के चार संयंत्र, फिर 120 मेगावॉट की दो इकाई , 210 मेगावॉट की चार इकाई , 500 मेगावॉट की एक इकाई और अब 660 मेगावॉट की पहली सुपर क्रिटिकल ताप संयंत्र।

एनटीपीसी का बड़ा विद्युत केंद्र बना छत्तीसगढ़

1975 में नेश्नल थर्मल पॉवर कार्पोरेशन (एनटीपीसी) और नेश्नल हाइडल पॉवर कार्पोरेशन (एनएचपीसी) की स्थापना की गई। ताप विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बने एनटीपीसी ने छ्त्तीसगढ़ में अपने संयंत्र लगाने की योजना तैयार की। इसके फलस्वरूप कोरबा पश्चिम में ही कोरबा सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन की 200 मेगावॉट की पहली इकाई ने मार्च 1983 में उत्पादन शुरू कर दिया। यह सिलसिला बढ़ता चला गया और कोरबा में जहाँ 2600 मेगावॉट क्षमता का उत्पादन संयंत्र स्थापित है वहीं रायगढ़ के लारा में 1600 मेगावॉट और 2980 मेगावॉट का संयंत्र बिलासपुर के सीपत में क्रियाशील है। आज 42 वर्ष बाद संयोग है कि छत्तीसगढ़ के ही सीपत में विस्तार योजना के तहत उन्नत तकनीक के साथ अधिक क्षमता के ताप विद्युत संयंत्र का शिलान्यास प्रधानमंत्री करने जा रहे हैं।

सीपत ताप विदयुत केन्द्र और प्रधानमंत्री

एक सुखद संयोग है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के तीसरे प्रधानमंत्री हैं जिनका नाम सीपत ताप विद्युत संयंत्र के साथ जुड़ रहा है। राज्य निर्माण के बाद पहली बार सीपत में ताप विद्युत संयंत्र का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने 28 जनवरी 2002 को किया था, इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. डॉ मनमोहन सिंह ने 19 सितंबर 2013 को इस उत्पादन गृह की सभी इकाइयों को राष्ट्र को समर्पित किया था। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों सीपत में पहले अल्ट्रा सुपर थर्मल पॉवर प्लांट का शिलान्यास हो रहा है।

सीटी गैस वितरण परियोजना

ऊर्जा के अन्य आयामों में भी छत्तीसगढ़ की भूमिका बढ़ रही है। इसी क्रम में शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों, वायु प्रदूषण में कमी लाने और स्वच्छ ऊर्जा समाधान प्रदान करने के अनुरूप कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर और सरगुजा जिलों में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की सिटी गैस वितरण (सीजीडी) परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री रखने जा रहे हैं। इसमें 200 किलोमीटर से अधिक हाई प्रेशर पाइपलाइन और 800 किलोमीटर से अधिक एमडीपीई (मीडियम डेंसिटी पॉलीइथिलीन) पाइपलाइन और 1,285 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई सीएनजी डिस्पेंसिंग आउटलेट शामिल हैं। देश में 1999 में गुजरात के आणंद में पहली बार सीजीडी की शुरूआत हुई थी, अब तक 307 भौगोलिक क्षेत्रों का इसके लिए चयन किय गया है , इस क्रम में छत्तीसगढ़ के कुछ शहर पहले ही शामिल हैं। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की 540 किलोमीटर लंबी विशाख-रायपुर पाइपलाइन (वीआरपीएल) परियोजना की भी आधारशिला प्रधानमंत्री रखेंगे। इस बहुउत्पाद (पेट्रोल, डीजल, केरोसिन) पाइपलाइन की क्षमता 3 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक होगी।

विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने, ऊर्जागढ़ के तौर पर छत्तीसगढ़ की भागीदारी मजबूत

तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री मोदी पहली बार छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। उन पर प्रदेश के लोगों का विश्वास सदैव रहा है। नई योजनाओं के साथ वे हर बार जन अपेक्षा और बढ़ा जाते हैं। नवरात्री के पहले दिन जब श्री मोदी छत्तीसगढ़ के समग्र विकास के लिए अनेक कार्यों का शुभारंभ करेंगे तो इस बार वे एक विश्वास साथ लेकर जाएंगे कि विकसित भारत की उनकी संकल्पना को साकार करने में ऊर्जागढ़ के तौर पर छत्तीसगढ़ की भागीदारी मजबूत है। प्रधानमंत्री ऊर्जा क्षेत्र के विकास और उन्नयन के लिए प्रयास ही नहीं वे ‘स्वर्णिम भविष्य’ का ‘शिलान्यास’ भी कर रहे हैं।

Prachand Prahar

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