August 24, 2026 |
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कछुओं की मौतछत्तीसगढ़बिलासपुररतनपुर

23 कछुओं की रहस्यमयी मौत, चीफ जस्टिस ने लगाई फटकार, मंदिर ट्रस्ट पर लग रहे गंभीर आरोप, आखिर क्या है सच्चाई?

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर/रतनपुर। रतनपुर स्थित प्रसिद्ध मंदिर मां महामाया शक्तिपीठ के मंदिर परिसर में बने कुंड में 23 कछुओं की रहस्यमय मौत के मामले को लेकर बवाल मचा हुआ है। मंदिर परिसर के कुंड में हुए 23 कछुओं की मौत ने पूरे ट्रस्ट को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्योंकि ट्रस्ट के आदेश पर ही ठेकेदार ने कुंड में जाल डाला और मछली बेचकर पैसे ट्रस्ट को दिए। अब जो बात निकलकर सामने आ रही है, उससे यह प्रतीत होता है कि क्या ठेकेदार कछुओं की तस्करी करने की तैयारी में था ? इससे उसे बड़ी राशि मिल सकती थी ? मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने इस मामले की सुनवाई के दौरान जमकर नाराजगी जताई और कड़ी फटकार भी लगाई।

बार-बार पुजारी और लेडी कहकर बचाव मत करिए, पवित्र स्थल को गंदा कर दिया गया

सुनवाई के दौरान वकील द्वारा बार-बार “पुजारी” शब्द का इस्तेमाल करने पर चीफ जस्टिस भड़क गए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “बार-बार पुजारी और लेडी कहकर बचाव मत करिए । पवित्र स्थल को गंदा कर दिया गया और आप उनका बचाव कर रहे हैं।” चीफ जस्टिस ने राज्य सरकार के वकील से भी सवाल पूछा कि इस मामले में एफआईआर सिर्फ पुजारी के खिलाफ ही क्यों दर्ज की गई है ? अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मुख्य न्यायाधीश की इस सख्ती से यह साफ है कि हाईकोर्ट इस मामले को बड़ी गंभीरता से लिया है । अब मंदिर ट्रस्ट की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। इस मामले में यह भी आशंका जताई जा रही है कि कही दुर्लभ प्रजाति के कछुओ को बेचने की योजना तो नहीं थी ? कहीं ऐसा तो नहीं की कछुओ को बेचने के लिए जाल में फंसा कर पानी में रखा गया था ! मगर इनकी संख्या अधिक होने से दम घुटने पर उनकी मौत हो गई।

लटक रही कार्रवाई की तलवार

हाईकोर्ट के संज्ञान में लेने के बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों और सेवादारों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट के संज्ञान में लेने के बाद सभी के खिलाफ जुर्म दर्ज हो सकता है और सभी को दुर्लभ कछुओं का शिकार करने के आरोप में जेल की हवा खानी पड़ सकती है। आपको बता दे नवरात्रि के एक दिन पहले मंदिर परिसर के एक कुंड के अंदर एक जाल में 23 कछुए मरे हुए मिले थे। इसके बाद मामले ने तुल पकड़ लिया था।

दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

इधर रतनपुर में न्याय मंच ने कछुओं की मौत के बाद ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नगर बंद, पुतला दहन और वन विभाग कार्यालय का घेराव कर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। मंदिर ट्रस्ट को भंग कर स्थानीय लोगों को समिति में शामिल करने की मांग की जा रही है, तो वही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी न्याय मंच द्वारा की जा रही है, जिससे आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसता जा रहा है।

मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रमेश सूर्या ने ठेकेदार और ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सूर्या ने कहा कि मछली मारने का ठेका किन शर्तों पर दिया गया। मामले की जांच जरूरी है। क्योंकि कुण्ड में मौजूद कछुआ दुर्लभ प्रजाति के हैं। सूर्या ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि “मंदिर ट्रस्ट की भूमिका भी संदिग्ध है। मछली मारने के लिए कुंड में जाल बिछाया गया था और उस जाल में फंसकर इन बेजुबान कछुओं की मौत हो गई। इतना ही नहीं, ट्रस्ट ने उस मछली को भी बेच दिया। यह सरासर पवित्र स्थल का अपमान है और इन निरीह जीवों की हत्या है।” उन्होंने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि जल्द ही साजिश को बेनकाब किया जाएगा ।”

कछुओं की मौत का रहस्य ?

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस संवेदनशील मामले में आगे क्या कार्यवाही होती है और क्या वास्तव में मंदीर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत सामने आते हैं ? क्या उनके खिलाफ भी अपराध दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी ? बहरहाल महामाया मंदिर में कछुओं की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। इंसाफ की उम्मीद में लोग हाईकोर्ट की ओर नजरें जमाए टकटकी लगाए हुए हैं।

Prachand Prahar

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