September 20, 2026 |
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छत्तीसगढ़धान खरीदीबारदाना घोटाला

बारदाना घोटाले का महाविस्फोट: धान खरीदी के साथ फूटा जूट बारदाना बम, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ में कम वजन की बोरियां, करोड़ों के घोटाले की आहट, जिले से प्रदेश तक फैला खेल

(प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क)

रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी सीजन की शुरुआत होते ही जूट बारदाना घोटाले का पुराना लेकिन खतरनाक खेल एक बार फिर सामने आ गया है। जांजगीर-चांपा और रायगढ़ जिलों में हुई शुरुआती जांच ने न सिर्फ जिला स्तर बल्कि पूरे प्रदेश की बारदाना खरीद और गुणवत्ता प्रमाणन प्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। इलेक्ट्रॉनिक कांटे से की गई जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे सीधे-सीधे करोड़ों रुपये की संभावित वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहे हैं।

हर बोरी में कटौती, हर खरीदी में चोरी

जांजगीर-चांपा और रायगढ़ के कई धान उपार्जन केंद्रों में जूट बोरियों का वजन जब इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर तौला गया तो मानक 580 ग्राम के मुकाबले भारी कमी निकली। तीन नमूना बोरियों का वजन क्रमशः 512 ग्राम, 520 ग्राम और 494 ग्राम दर्ज किया गया। 20 से अधिक स्थानों पर किए गए सत्यापन के बाद यह सामने आया कि औसतन 70 से 80 ग्राम प्रति बोरी कम वजन की आपूर्ति की जा रही है।

खरीद एजेंसियों के अनुसार एक जूट बोरी की कीमत लगभग 99 रुपये तय है। इसी मानक के अनुसार 80 ग्राम कम वजन का सीधा आर्थिक मूल्य लगभग 16 से 17 रुपये प्रति बोरी बैठता है। यानी हर बोरी के साथ खुलेआम कटौती।

एक जिले का आंकड़ा, पूरे प्रदेश की कहानी

पिछले खरीदी वर्ष में सिर्फ जांजगीर-चांपा जिले में लगभग 6.4 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई। 50-50 प्रतिशत उपयोग नीति के तहत करीब 16 हजार गठान अर्थात लगभग 80 लाख जूट बोरियों की आवश्यकता पड़ी। यदि प्रति बोरी न्यूनतम 16 रुपये की गड़बड़ी मानी जाए तो केवल एक जिले में ही लगभग 12.80 करोड़ रुपये का संभावित घोटाला सामने आता है। रायगढ़ जिले में भी स्थिति लगभग समान बताई जा रही है, जिससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि यह कोई स्थानीय चूक नहीं, बल्कि पूरे तंत्र में फैली संगठित गड़बड़ी है।

शक के घेरे में विपणन संघ और क्रय एजेंसियां

जानकार सूत्रों और कर्मचारियों के भीतरखाने के बयानों के अनुसार जूट सप्लाई करने वाली फर्मों और विपणन संघ के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका लगातार गहराती जा रही है। आरोप यह है कि गुणवत्ता प्रमाणन की प्रक्रिया कागजों तक सीमित रह गई है और कम वजन की बोरियों को जानबूझकर मानक बताकर स्वीकार किया गया। पूरा भुगतान फुल रेट पर किया गया, जबकि सामग्री कम वजन वाली आपूर्ति की गई। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि कुछ जांच समितियों ने वास्तविक जांच किए बिना प्रभाव में आकर अमानक बारदाने को मानक मान लिया।

विशेषज्ञों की राय, जांच का दायरा बढ़ाने की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला स्तर पर प्रत्येक ब्लॉक से कम से कम 50-50 गठानों का सैंपल लेकर वजन और गुणवत्ता का परीक्षण होना चाहिए। इसके साथ ही विपणन अधिकारी कार्यालय की भूमिका की गहन जांच जरूरी है कि गुणवत्ता प्रमाणन के दौरान किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई। यह भी तय होना चाहिए कि किस अधिकारी ने किस आधार पर जूट सप्लाई स्वीकार की और भुगतान की अनुमति दी।

किसानों और समितियों पर दोहरी मार

किसानों का कहना है कि कम वजन की बोरी का सीधा अर्थ है अधिक धान भरना, जिससे आर्थिक नुकसान सीधे किसान पर पड़ता है। दूसरी ओर कमजोर बोरियों के कारण तौल, सिलाई और परिवहन के दौरान बोरियां फटने की संभावना बढ़ जाती है। इसका खामियाजा सेवा सहकारी समितियों को भुगतना पड़ता है, जहां कमीशन कटने और खरीदी प्रभारी पर रिकवरी की कार्रवाई तक की नौबत आती है।

जिले से प्रदेश तक फैला खेल

जांजगीर-चांपा और रायगढ़ में उजागर हुआ यह मामला केवल दो जिलों की कहानी नहीं दिखता, बल्कि यह प्रदेशव्यापी बारदाना घोटाले की ओर साफ संकेत करता है। शुरुआती गणनाएं ही करोड़ों के नुकसान की बात कह रही हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह छत्तीसगढ़ के धान उपार्जन इतिहास का सबसे बड़ा जूट बारदाना घोटाला साबित हो सकता है।

Prachand Prahar

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