डामर महंगा हुआ तो ठेकेदारों को राहत, बेलतरा की बदहाल सड़कों को राहत कब?
शासन ने PWD के पात्र ठेकों में अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान किया, अंकित गौरहा ने उठाए सवाल—नगर निगम के ठेकों और लंबित सड़कों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क, बिलासपुर।
डामर की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि के बाद छत्तीसगढ़ शासन ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के पात्र अनुबंधित कार्यों के लिए आंशिक क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया है। वहीं, बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की बदहाल सड़कों को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने सवाल उठाया है कि निर्माण लागत और भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान कब होगा और आम जनता को जर्जर सड़कों से राहत कब मिलेगी? शासनादेश में दर्ज प्रावधान और गौरहा द्वारा उठाए गए सवाल दो अलग-अलग पहलू हैं—एक सरकारी निर्णय है, तो दूसरा सड़क निर्माण की स्थिति और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर राजनीतिक मांग।

शासनादेश क्या कहता है?
छत्तीसगढ़ शासन, लोक निर्माण विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर द्वारा 31 मई 2026 को जारी आदेश क्रमांक F GENS/22012/2026-PWD SECTION/Nivida के अनुसार, डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि को देखते हुए पात्र अनुबंधित कार्यों के लिए आंशिक राहत देने का निर्णय लिया गया है। आदेश में खाड़ी युद्ध जैसी वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि निर्माण, नवीनीकरण और संधारण के कार्य राज्यहित में शीघ्र पूरे कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है। यह निर्णय 26 मई 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के फैसले के परिपालन में लिया गया।

आदेश के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
- लागू अवधि: 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक।
- पात्र अनुबंध: लोक निर्माण विभाग के राज्य वित्तपोषित अनुबंधित कार्य, जिनकी निविदा जमा करने की अंतिम तिथि अप्रैल 2026 से पहले थी।
- क्षतिपूर्ति का आधार: डामर की वास्तविक उपयोगित मात्रा और संबंधित कीमतों के अंतर के आधार पर अतिरिक्त भुगतान।
- गणना का तरीका: 1 मार्च 2026 को निकटतम IOCL रिफाइनरी की डामर की मूल कीमत तथा कार्य अवधि के चालान में दर्ज मूल कीमत के अंतर के अनुसार भुगतान निर्धारित होगा। वास्तविक खपत स्वीकृत जॉब मिक्स फॉर्मूले में निर्धारित मात्रा से अधिक नहीं मानी जाएगी।
- मूल्यवृद्धि की शर्त: इस अवधि में डामर घटक पर अनुबंध के तहत सामान्य मूल्यवृद्धि अलग से देय नहीं होगी। अन्य घटकों का मूल्य समायोजन अनुबंध की मूल्यवृद्धि संबंधी शर्तों के अनुसार किया जाएगा।
इस प्रकार, आदेश डामर की बढ़ी लागत से प्रभावित पात्र PWD अनुबंधों के लिए सीमित अवधि की क्षतिपूर्ति व्यवस्था निर्धारित करता है। इसमें नगर निगम के सभी ठेकों पर समान राहत लागू होने की कोई स्वतः पुष्टि नहीं है।
अंकित गौरहा के सवाल और आरोप
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने बेलतरा क्षेत्र की सड़कों की बदहाली और निर्माण कार्यों में हो रही देरी को लेकर सरकार तथा संबंधित विभागों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि बढ़ी हुई निर्माण लागत के कारण ठेकेदारों को राहत देने की व्यवस्था बनाई जा रही है, तो सड़क निर्माण से जुड़ी बाधाओं को दूर कर जनता को राहत देने के लिए भी स्पष्ट कदम उठाए जाने चाहिए।
गौरहा पूर्व में मंगला चौक से दीनदयाल कॉलोनी, अशोक नगर से बिरकोना, चांटीडीह चौक से डीएलएस कॉलेज मार्ग, सेंदरी से मोपका बायपास, राजकिशोर नगर चौक से छठघाट और साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी मार्ग सहित कई सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा उठा चुके हैं।
उनकी मांग है कि संबंधित विभाग इन सड़कों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करें और सार्वजनिक रूप से बताएं कि किन कार्यों को स्वीकृति मिली है, किनका निर्माण या नवीनीकरण लंबित है, कितनी राशि स्वीकृत हुई है तथा काम पूरा करने की समयसीमा क्या है।
यह गौरहा द्वारा उठाए गए सवाल और उनकी राजनीतिक मांगें हैं। संबंधित सड़कों की मौजूदा स्थिति, भुगतान में देरी या ठेकेदारों के साथ विवाद के संबंध में स्वतंत्र विभागीय पुष्टि उपलब्ध होने पर ही किसी विशिष्ट आरोप को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
नगर निगम के ठेकों पर स्पष्टता की मांग
गौरहा ने नगर निगम के ठेकेदारों की ओर से बढ़ी हुई लागत के मद्देनजर राहत की मांग का मुद्दा भी उठाया है। उनका सवाल है कि नगर निगम के सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में लागत वृद्धि से जुड़ी समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाएगा।
हालांकि, 31 मई 2026 का शासनादेश लोक निर्माण विभाग के निर्धारित पात्र अनुबंधों के लिए है। नगर निगम के ठेकों पर ऐसी ही व्यवस्था लागू है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए संबंधित निगम के निर्णय, अनुबंध की शर्तों अथवा अलग आदेश की जानकारी आवश्यक है।
इसलिए नगर निगम के ठेकेदारों को राहत नहीं मिलने का निष्कर्ष केवल PWD के इस आदेश के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। लेकिन संबंधित निकाय के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि लागत वृद्धि से जुड़ी मांगों पर क्या निर्णय लिया गया है और लंबित सड़क कार्यों को पूरा करने की क्या योजना है।
जनता की मांग—सड़क कब बनेगी?
बेलतरा में सड़कों की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं होगा। इसके लिए संबंधित विभागों को कार्यवार स्थिति, स्वीकृत बजट, भुगतान की प्रगति, निर्माण की समयसीमा और देरी के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क का सवाल यह है: जब डामर की बढ़ी कीमतों के मद्देनजर पात्र PWD अनुबंधों के लिए क्षतिपूर्ति का स्पष्ट फार्मूला बनाया जा सकता है, तो बेलतरा की लंबित सड़कों के संबंध में भी कार्यवार प्रगति और समयसीमा सार्वजनिक क्यों नहीं की जानी चाहिए?
गौरहा ने सरकार और संबंधित विभागों से जवाबदेही तय करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन सवालों पर क्या आधिकारिक जानकारी देता है और सड़क सुधार के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए जाते हैं।
जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब भी वही है—सड़क कब बनेगी, मरम्मत कब होगी और काम पूरा करने की जिम्मेदारी किसकी होगी? शासनादेश की सफलता का आकलन पात्र कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन से होगा, जबकि बेलतरा की सड़कों पर राहत का आकलन जमीन पर दिखाई देने वाले सुधार से किया जाएगा।
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प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर, छत्तीसगढ़।



