सरकारी दफ्तर में ताला लगाने वाले ठेकदारों के खिलाफ होगी कार्यवाही ?
ईडी और एसई को विरोध प्रदर्शन की नहीं थी जानकारी

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। विद्युत अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच बिल भुगतान को लेकर इन दिनों खींचातानी चल रही है। पिछले एक – दो वर्ष पूर्व जिन कार्यों को ठेकेदार पूरा कर चुके है उसका आज तक भुगतान नही किया जा सका है। जिसके चलते ठेकदार तो परेशान है ही साथ ही साथ विद्युत अधिकारी भी परेशान है। हाल ही में बिजली ठेकेदारों ने सीई ऑफिस तिफरा में भुगतान को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकारी दफ्तर में ताला जड़ दिया।

जिसके बाद एसई श्री जांगड़े की समझाइश के बाद ठेकेदारों ने प्रदर्शन बंद कर दिया। इस संबंध में एसई श्री जांगड़े ने मीडिया को बताया कि “ठेकेदारों को पिछले एक- दो साल का भुगतान नही हो पाया है। इसके चलते उन्होंने कार्यालय का घेराव किया था। उनकी समस्याओं का निराकरण किया जाएगा।” सरकारी दफ्तर में ताला लगाने के मामले में ठेकदारों के खिलाफ कार्यवाही के सवाल पर एसई ने बताया उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। इसके लिए उच्च स्तर के अधिकारी से चर्चा की जा रही है।
सरकारी दफ्तर में ताला लगाना गैरकानूनी ?
सरकारी कामकाज में गड़बड़ी या समस्या आने पर विरोध प्रदर्शन तो होते ही रहता है लेकिन एक सरकारी दफ्तर में ताला लगा दिया जाना और ऐसा करने वालों के खिलाफ विद्युत अधिकारियों द्वारा दो दिन बाद भी किसी प्रकार की उचित कार्यवाही नहीं कर पाना यह बात अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह उठाता है। अब यहां पर सवाल उठता है कि चाहे मांगे कितनी भी जायज हो लेकिन क्या इस प्रकार के गैरकानूनी कार्य करने वाले ठेकेदारों को राहत दी जानी चाहिए या इन पर कार्यवाही करना न्यायोचित होगा जो अनुचित कार्य करने वालों के लिए एक नजीर बनेगी । इस दौरान सरकारी दफ्तर के अधिकारी कर्मचारियों के बीच कई तरह की अफवाहों का बाजार भी गरम है कोई कहता है अधिकारियों के कहने पर ही ठेकेदारों ने विरोध प्रदर्शन किया है तो कोई कहता है कि विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली से मजबूर होकर ठेकेदारों को आक्रोशवश यह कदम उठाना पड़ा। मतलब इधर हंगामा कराकर ठेकेदारों के बिल भुगतान में लगे ग्रहण को विद्युत अधिकारी ही साफ करने में लगे है? शायद इसीलिए सरकारी दफ्तर में ताला लगाने वाले विद्युत ठेकदारों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की गई?
आखिर क्यो आक्रोशित हुए विद्युत ठेकेदार?
विदित हो कि ठेकेदारों के द्वारा 5 लाख रूपये तक का एडवांस टेंडर कार्य बिना निविदा के किया जाता है जबकि जरूरी कार्य बता कर 5 लाख रूपये से अधिक के कार्य करवा लिए जाते हैं और बाद में नियम का हवाला देते हुए ठेकेदारों का भुगतान तय समय पर नहीं किया जाता। 28, 32 पी के द्वारा जितने भी कार्य कराए गए हैं उन सभी कार्यों को जांच के नाम पर विगत दो वर्षों से ठेकेदारों को बिल भुगतान नही किया गया हैं। जिसके कारण ठेकदार मानसिक और आर्थिक परेशानी झेल रहे है। कंपनी को अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा कराए गए कार्यों पर विश्वास नहीं है और सभी कार्यों में प्रश्न चिन्ह लगाया जा रहा है। जांच टीम के रिपोर्ट के पश्चात ही भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है जिसके कारण ठेकेदारों को बहुत ही ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि कंपनी को किसी भी वीआईपी के लिए कोई कार्य कराना हो तो ठेकेदारों से बिना किसी प्राक्कलन के कार्य को पूर्ण करा लिया जाता है। जिसमें किसी भी प्रकार का नियम का पालन नहीं किया जाता है। यदि ठेकेदार कंपनी के कार्य को एडवांस में करते है तो उसमें प्रश्न चिन्ह क्यों? ठेकदारों का कहना है यदि कंपनी को कार्य करने के पश्चात जांच टीम बनाकर ही भुगतान करना है तो कहीं खंभे टूटते हैं तो उसे जांच टीम बनाकर उसका जांच करने के पश्चात ही प्राकलन बनाएं और उसका निविदा होने के पश्चात ही भविष्य में कार्य कराना सुनिश्चित करें ताकि कार्य करने के पश्चात किसी भी ठेकेदारों को भुगतान संबंधित कोई भी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े। विगत 2 वर्षों से केवल बिलासपुर में 32,28 के जांच की प्रक्रिया चल रही है। जिसका कोई समय सीमा का निर्धारण नहीं किया गया है। अधिकारियों से पूछने पर ठेकदारों को कोई संतोष जनक उत्तर नहीं मिलता है। ठेकेदारों के सब्र का बांध टूट गया है। ठेकदारों ने विद्युत अधिकारियों से निवेदन किया है कि 15 दिवस में सभी ठेकेदार का बकाया बिल भुगतान एवं बचे हुए प्राक्कलन को बनाया जावे और तब तक किसी भी ठेकेदारों से किसी प्रकार का कार्य नहीं कराया जाए। अनुबंध ने भुगतान के लिए 1 माह का नियम बनाया गया है।किंतु इसके बाद भी एक से दो वर्षों की देरी हो रही है जिसकी ब्याज सहित भुगतान और जो भी अधिकारी देरी के जिम्मेदार है उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
क्या सरकारी खजाना खाली हो गया?
क्या सरकारी खजाना खाली हो गया है? जो कि दो साल पहले पूरे हो चुके सरकारी कामकाज का भुगतान ठेकदारों को नही किया गया? परम्परा रही हैं कि खासकर जब- जब सरकारें बदलती है। कई विभागों के निविदा कार्यों का भुगतान रोक दिया जाता है। शायद यह अंदेशा रहता होगा कि विकास कार्यों के दौरान ठेकेदारों और अधिकारियों की सांठगांठ में भ्रष्टाचार हुआ होगा । जिसके कारण शासन के आदेश पर ठेकेदारों के भुगतान को छत्तीसगढ़ में रोक दिया गया ? क्या विद्युत विभाग के ठेकेदार और अधिकारी किसी बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम देने में जुटे हुए है जिसके चलते ठेकेदारों को बकाया बिल के भुगतान के लिए विलंब किया गया?
इस मामले में कार्यवाही के सवाल पर मीडिया से चर्चा के दौरान एसई श्री जांगड़े ने उच्चाधिकारियों से चर्चा उपरांत एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है वही कार्यकारी निदेशक श्री अंबष्ट ने प्रदर्शन की जानकारी नहीं होने की बात कही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि विद्युत विभाग इस मामले पर किस प्रकार की कार्यवाही करेगी या मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा ?
क्रमशः



