
प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। बिलासपुर शहर के वर्षो पुराने एकमात्र विसर्जन स्थल/पचरीघाट को पुनः व्यवस्थित बनाने अरपा मईया भक्तजन समिति ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव व नगर विधायक अमर अग्रवाल सहित जिलाधीश बिलासपुर एवं नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर गुहार लगाया है।

दरअसल शहर के लोग बरसो से अरपा नदी में बारह महीनों स्वच्छ और निर्मल जल लबालब भरा रहे यह सपना संजोए अरपा में बनाए जा रहे दोनो बैराज के पूरी होने की बड़ी बेसब्री से राह देख रहे हैं कि कब निर्माण पूरा हो और अरपा नदी में निर्मल जल कलकल बहता दिखाई दे । इसी तरह पचरीघाट में बन रहे बैराज का भी यहां के स्थानीय निवासियों के द्वारा भी बेचैनी से इंतजार किया जा रहा है ताकि बैराज निर्माण के बाद यहां पुनः नए पचरीघाट (विसर्जन स्थल) का निर्माण किया जा सके।

लेकिन अब उनकी चाहत को ग्रहण लगते हुए नजर आ रहा है’ कहा जा रहा है कि अब विसर्जन स्थल (पचरी) के निर्माण के लिए यहां जगह नही बची है। उसकी जगह अब दूसरे प्रोजेक्ट ने ली है। जिससे अब शहर के लोगों को इस बात का भी डर सताने लगा है। अरपा नदी पर बन रहे इन दोनो बैराज का हाल भी तो कही शहर के लिए नासूर बन चुके सीवरेज परियोजना के जैसा ना हो जाए…। वैसे तो नियमानुसार इन दोनों ही बैराज को अब तक बनकर तैयार हो जाना था। लेकिन आज की वर्तमान स्थिति में उन्हें देखकर यह कतई नहीं लगता कि यह निर्माण कार्य तय समय पर पूरा हो पाएगा।


“विसर्जन स्थल (पचरी) को तोड़कर बनाया जा रहा बैराज”
ज्ञातव्य है कि इन दोनो बैराजों में से एक बैराज का निर्माण पचरीघाट में भी किया जा रहा है। जिसके निर्माण के लिए यहां पहले से बने विसर्जन स्थल (पचरी) वाले जगह का उपयोग किया गया है, साथ ही यहां पर बने नाले को तोड़कर अव्यवस्थित रूप से कच्चे नाले के रूप में तब्दील कर बैराज निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया । जिसके कारण मोहल्लेवासियो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बैराज निर्माण के दौरान मोहल्लेवासियों को आश्वासन दिया गया कि इस विसर्जन स्थल (पचरी) के स्थान पर यही आसपास दूसरे विसर्जन स्थल (पचरी) का निर्माण करके दिया जाएगा और इस क्षेत्र का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा साथ ही इस गंदे नाले को नदी से दूर कर पक्के नाले के रूप में व्यवस्थित किया जाएगा। जिससे मोहल्लेवासियों के मन में आस जगी कि इस बैराज और नए विसर्जन स्थल (पचरी) के निर्माण हो जाने से क्षेत्र का कायाकल्प हो सकता है, यहां की सुंदरता बढ़ जाएगी और नदी में बढ़ रहे प्रदूषण से छुटकारा मिल जाएगा इसके अलावा अन्य सभी दैनिक उपयोगों के लिए लबालब भरे नदी के स्वच्छ जल का लोग साल भर इस्तेमाल कर सकेंगे। लेकिन अब उनकी मंशा पर पानी फिरते नजर आ रहा है।
“दो दशक पहले तक स्वच्छ थी अरपा, लोग भी नदी का रखते थे ख्याल”
दो दशक पहले तक अरपा नदी स्वच्छ थी। लोग भी नदी का ख्याल रखते थे। जैसे-जैसे शहर ने विकास की रफ्तार पकड़ी और जनसंख्या बढ़ती गई, नदी का तेजी से दोहन होने लगा। शहर के सभी नालों का पानी नदी में छोड़ा जाने लगा और अब भी यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। ऐसे में नदी का पानी पूरी तरह से गंदा हो चुका है। जिसके उपचार के लिए देवरीखुर्द में अरपा एनीकट बनाया गया है। अब इस पर दो बैराज का भी निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नदी के पानी को रोकना था। पानी स्र्का भी। लेकिन यह शहर के नालों का गंदा पानी है।

“बैराज निर्माण पूर्णता की ओर, लेकिन अब नही होगा विसर्जन स्थल (पचरी) का निर्माण”
मिली जानकारी अनुसार पचरीघाट स्थित निर्माणाधीन बैराज तो कथित रूप से पूर्णता की ओर है लेकिन अब यहां विसर्जन स्थल (पचरी) निर्माण नही होने की बात कही जा रही है, क्योंकि जहां पर विसर्जन स्थल (पचरी) निर्माण किया जाना था वहां पर अब नए प्रोजेक्ट के तहत एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है। जिसकी वजह से अब यहां पर विसर्जन स्थल (पचरी) निर्माण के लिए जगह नहीं बची है। जिसे लेकर मोहल्लेवासियों का विरोध दिखने लगा है और इस प्रशासनिक निर्णय के प्रति लोगो में आक्रोश भी दिखने लगा है। जिससे सभी लोग अब लामबंद होकर विरोध की तैयारी में जुटने लगे है।
“दैनिक दिनचर्या के लिए सालो से किया जाता रहा है उपयोग”
गौरतलब है कि सदियों से इन नदी पोखरों का उपयोग आमजनों के द्वारा दैनिक दिनचर्या के लिए किया जाता रहा है। शास्त्रों के अनुसार नदी, तालाब, कुंड आदि स्थानों में ही पूजा पाठ से संबंधित कार्य, मूर्तियों का विसर्जन, पितरो का तर्पण, छठपूजा, स्नान, ध्यान, तप, आदि करने की परम्परा है। जिसे हिंदू समाज के द्वारा अक्षरशः पालन किया जाता है, जो आज भी अनवरत जारी है और इसी तरह बिलासपुर के पचरीघाट से होकर निकले पुण्य सलिला मां अरपा के जल का उपयोग भी सभी क्षेत्र वासियों के द्वारा बरसो से किया जाता रहा है लेकिन लगता है कि इस परंपरा को अब ग्रहण लगने वाला है।

“आस्था के साथ हो रहा खिलवाड़, उठ रहे विरोध के स्वर”
विदित हो कि करीब 100 वर्षो से सभी प्रकार के विसर्जन कार्य के लिए स्थानीय लोगो के द्वारा इस पचरीघाट का उपयोग किया जाता रहा है । बैराज निर्माण के लिए पचरीघाट स्थित विसर्जन स्थल को तोड़ दिया गया था। बैराज निर्माण के समय प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि यहां नए तरीके से पचरीघाट विसर्जन स्थल का निर्माण कराया जाएगा। लेकिन अब यहां विसर्जन स्थल (पचरीघाट) का निर्माण नही किया जाना आस्था के साथ खिलवाड़ किया जाना प्रतीत हो रहा है। इस प्रशासनिक निर्णय से स्थानीय लोगो में काफी रोष नजर आ रहा है। इस विसर्जन स्थल के पुनः निर्माण की मांग प्रशासन व उपमुख्यमंत्री अरुण साव और शहर विधायक अमर अग्रवाल से की गई है। इसे लेकर अरपा मईया भक्तजन समिति ने कलेक्टर और निगम कमिश्नर को भी ज्ञापन सौंपा है साथ ही सभी दुर्गोत्सव, गणेशोत्सव समितियों तथा स्थानीय लोगो से अपील भी की गई है कि वर्षो पुराने चले आ रहे इस परम्परा, धरोहर को संजोकर रखने में अपना सहयोग प्रदान करे। चूंकि यह समस्या बड़ी है। जिसके निराकरण के लिए त्वरित प्रशासनिक कार्यवाही की आवश्यकता है।




