May 25, 2026 |
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छठ पूजा

नहाय- खाय के साथ शुरू होगा सूर्योपासना का महापर्व, देश के सबसे बड़े स्थायी घाट की मिसाल, बिहार और झारखंड जैसे छठ पर्व के पारंपरिक राज्यों में भी नहीं

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित देश के सबसे बड़े स्थाई छठ घाट पर छठ महापर्व की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. बिलासपुर के तोरवा स्थित यह छठ घाट लगभग 7.5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां एक किलोमीटर लंबे क्षेत्र को पूजा करने के लिए विकसित गया है, जहां श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य देंगे. आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा और उनके सहयोगियों ने घाट की सफाई और सौंदर्यीकरण कार्य की जिम्मेदारी स्वयं संभाल रखी है. बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी और स्थायी व्यवस्था वाले घाट की मिसाल बिहार और झारखंड जैसे छठ पर्व के पारंपरिक राज्यों में भी नहीं मिलती।

चार दिनों तक चलने वाला महापर्व

देश के सबसे बड़े स्थाई छठ घाट पर लाखों श्रद्धालु भगवान सूर्य नारायण को अर्घ्य देंगे. यह महापर्व 25 से 28 अक्टूबर तक मनाया जाएगा, जिसकी शुरुआत “नहाय-खाय” से होगी। इस दिन छठव्रती नए परिधान पहन कर घर के अन्य महिला सदस्यों के साथ मिट्टी के नए चूल्हे में अरवा चांवल की भात, मूंग की दाल, कद्दू की सब्जी, अन्य सब्जी, तरुआ पकाएंगी, जिसे व्रती ग्रहण करेंगी। 26 को खरना और 27 तारीख को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 28 अक्टूबर मंगलवार को अरूणोदय काल में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पण करने के साथ सूर्योपासना का महापर्व सम्पन्न हो जाएगा। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास व्रत भी समाप्त हो जाएगा। यह व्रत परिवार में सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है।

छत्तीसगढ़ में भी छठ महापर्व की धूम

छठ पर्व पारंपरिक रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, लेकिन पिछले एक दशक से छत्तीसगढ़ में भी इसका उत्साह तेजी से बढ़ा है. बिलासपुर सहित राज्य के कई हिस्सों में अब स्थानीय लोग भी पूर्वांचल समुदाय के साथ इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. छठ महापर्व की तैयारी को लेकर न्यायधानी बिलासपुर में रहने वाले पूर्वाचल के लोगों में गजब का उत्साह नजर आ रहा हैं। वहीं पूजा के लिए जरूरी सामान भी बाजार में पहुंचने लगे है। शहर के प्रमुख बाजारों बुधवारी, वृहस्पति, शनिचरी बाजार, सहित अन्य इलाकों में भी बांस की टोकरी, सूपा, फल – फूल, नारियल, कद्दू सहित पूजा की अन्य सामाग्री बेचने वाले छोटे कारोबारियों ने भी अपनी तैयारी पूरी कर रखी हैं। 4 दिन तक चलने वाले सूर्य उपासना के महापर्व आज से शुरू हो रहा है।

36 घंटे तक निर्जला व्रत, कद्दू की सब्जी का विशेष महत्व

यह पर्व कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तिथि तक चलता है। कार्तिक माह में मनाए जाने वाले छठ का अपना विशेष महत्व है। कार्तिक के छठ को लेकर व्रतियों की संख्या ज्यादा रहती है। कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि के दिन छठव्रती नदी और सरोवर में स्नान कर व्रत के लिए खुद को तैयार करेंगे। इसे नहाय-खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन छठव्रती कद्दू की सब्जी विशेष रूप से ग्रहण करेंगे। इसके अलावा अपनी इच्छानुसार शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही 36 घंटे तक निर्जला व्रत की शुरुआत होगी।

माता अरपा की महाआरती से होगा छठ महापर्व का शुभारंभ

छठ पर्व की तैयारियां छठ पूजा समिति, जिला प्रशासन और नगर निगम के सहयोग से पूरी कर ली गई है। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस प्रशासन के निर्देश पर कार्य किया जा रहा है। छठ घाट पर माता अरपा की महाआरती से महापर्व का शुभारंभ हो जाएगा।

तैयारी में जुटे पदाधिकारी

छठपूजा संचालन समिति के लिए पांच सदस्य बनाए गए हैं। इसमें प्रवीण झा, डॉ. धर्मेन्द्र दास, अभयनारायण राय, सुधीर झा, बी. एन. ओझा सदस्य है। पाटलिपुत्र सांस्कृतिक विकास मंच, भोजपुरी समाज, स्वामी सहजानंद सरस्वती समाज के पदाधिकारी आवश्यक तैयारी में जुटे हुए है।

 

 

Prachand Prahar