फर्जी नियुक्ति मामले में संयुक्त कलेक्टर ने आयुर्वेद विभाग के प्राचार्य को जारी किया पत्र, एक व्यक्ति के दो अंकसूची का मामला,,,,
जिला आयुर्वेद विभाग में फर्जी डिग्री के दम पर नौकरी करने वाले कर्मचारियों का भंडाफोड़, कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बजाए अधिकारी कर रहे लीपापोती ?

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आयुर्वेद विभाग से जुड़े एक फर्जी नियुक्ति का मामला सुर्खियों में है। जहां इस नियुक्ति मामले में आयुर्वेद महाविद्यालय/ चिकित्सालय के प्राचार्य/अधीक्षक पर कार्यवाही नहीं करने का आरोप लगाया गया है। इस प्रकरण में एक ही व्यक्ति द्वारा दो अलग अलग अंकसूची का उपयोग कर चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति पाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में संयुक्त कलेक्टर बिलासपुर ने सात दिवस के भीतर प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय को उपलब्ध कराने हेतु पत्र जारी किया है।

विदित हो कि चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति मामले में एक व्यक्ति द्वारा दो अलग अलग अंकसूची जारी करवाया गया जिसमें से एक अंकसूची रेगुलर व एक समतुल्यता प्रमाण पत्र जारी किया गया था। जिसमें समतुल्यता प्रमाण पत्र का प्रतिशत 97% व एक अन्य प्रमाण पत्र 44% है, जिसमें से 44% का प्रमाण पत्र वर्ष 2009 में जारी हुआ हैं उससे एक वर्ष पूर्व 2008 में 97% का है। इससे यह सवाल उठता हैं कि श्रेणी सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ी ?

शिकायतकर्ता का स्पष्ट रूप से कहना है कि प्रमाण पत्र फर्जी है व इनकी नियुक्ति भी फर्जी है क्योंकि भर्ती नियम के अनुसार यदि समतुल्यता प्रमाण के अतिरिक्त प्रमाण पत्र अर्थात दो दो प्रमाण पत्र धारी को यदि पाया जाता है तो उसकी नियुक्ति निरस्त कर दी जाएगी, आवेदन में शपथ पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया है ।

इस पूरे मामले में विभाग को कई बार शिकायत किया जा चुका हैं लेकिन विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है, अब देखने वाली बात यह होगी कि इस पूरे मामले में विभाग कब तक कार्यवाही करेगा। जिला आयुर्वेद विभाग के कई कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी अंकसूची की पुष्टि किया जा चुका है जिनके खिलाफ आज तक एफआईआर दर्ज नही कराया गया है। बस कागजों में कार्यवाही लंबित रखा गया है।




