छठ महापर्व की कमान प्रवीण झा को, विनोद सिंह बने सचिव; 13 से 16 नवंबर तक अरपा तट पर गूंजेगी छठी मैया की महिमा
एशिया के सबसे बड़े स्थायी छठ घाट की पहचान, 26 वर्षों से अटूट परंपरा… अरपा तट पर फिर गूंजेगा छठी मैया का जयकारा! श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्थाओं पर रहेगी नजर...
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर ।
🙏 जय छठी मैया! जय सूर्यदेव! 🙏
बिहार की मिट्टी से जुड़ी लोकआस्था… छठी मैया के प्रति अटूट विश्वास… और उगते-डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की अनुपम परंपरा!
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर का तोरवा छठ घाट आज छठ महापर्व की भव्य पहचान बन चुका है। एशिया के सबसे बड़े स्थायी छठ घाटों में शुमार इस घाट पर पिछले 26 वर्षों से सामूहिक छठ महापर्व मनाने की परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है।

लोकआस्था, अनुशासन और सामाजिक एकजुटता के महापर्व छठ पूजा को लेकर न्यायधानी बिलासपुर में तैयारियां तेज होने लगी हैं। अरपा तट स्थित छठ घाट पर आयोजित सामूहिक बैठक में छठ महापर्व 2026 के आयोजन के लिए नई समिति का गठन किया गया। सर्वसम्मति से प्रवीण झा को अध्यक्ष और विनोद सिंह को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। बिलासपुर में पिछले 26 वर्षों से सामूहिक रूप से छठ महापर्व मनाए जाने की परंपरा रही है। अब नई कार्यकारिणी के गठन के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है।

पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच, भोजपुरी समाज, सहजानंद सरस्वती समाज और छठ माता के श्रद्धालुओं की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता व्ही.एन. झा ने की। बैठक में आयोजन की रूपरेखा पर चर्चा हुई और विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां तय की गईं। आयोजन समिति का उद्देश्य पर्व से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों का समन्वय करना और सामूहिक आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है।
प्रवीण झा के नेतृत्व में नई कार्यकारिणी गठित
नई समिति में डॉ. धर्मेंद्र कुमार दास को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। उपाध्यक्ष के रूप में सुधीर झा, ए.के. कंठ, लव कुमार ओझा और राम प्रताप सिंह को जिम्मेदारी दी गई है।
सहसचिव के पद पर रौशन सिंह, धनंजय झा और प्रशांत सिंह को शामिल किया गया है। कार्यालय सचिव की जिम्मेदारी हरिशंकर कुशवाहा, दिलीप चौधरी और राकेश दीक्षित को सौंपी गई है। वहीं डॉ. कुमुद रंजन सिंह कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं।

कार्यकारिणी सदस्य के रूप में पी.सी. झा, चंद्र किशोर प्रसाद, अजीत पंडित, प्रमोद सिंह, रामसखा चौधरी, मुकेश झा, चंदन सिंह, राजीव गिरी, निर्भय चौधरी, दिलीप श्रीवास, विकास राय, सतीश सिंह, विनोद सिंहा, हेमंत सिंह, जितेंद्र ठाकुर, परमेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह, रविंद्र सिंह, आशीष मिश्रा, अंबिकेश पांडे, रविंद्र कुशवाहा, शैलेंद्र सिंह, रुपेश कुशवाह और आदित्य सिंह को शामिल किए जाने की जानकारी प्रकाशित रिपोर्टों में दी गई है।
वरिष्ठ सदस्यों का संरक्षक मंडल भी बनाया गया
आयोजन समिति को मार्गदर्शन देने के लिए संरक्षक मंडल गठित किया गया है। इसमें एस.पी. सिंह, व्ही.एन. झा, आर.पी. सिंह, अशोक झा, एस.के. सिंह, विजय ओझा और अभय नारायण राय को शामिल किया गया है। बैठक का संचालन राम प्रताप सिंह ने किया। बैठक में डॉ. अजय सिंह, गणेश गिरी, सी.एम. सिंह, राम गोस्वामी सहित अनेक समाज प्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चार दिन, चार प्रमुख पड़ाव—13 नवंबर से शुरू होगा महापर्व
समिति की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार छठ महापर्व 13 से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में सूर्योपासना, व्रत, पारंपरिक प्रसाद और सामूहिक धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है।
13 नवंबर, शुक्रवार — नहाय-खाय एवं महाआरती: पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होगी। इसी दिन माता अरपा की महाआरती का आयोजन प्रस्तावित है।
14 नवंबर, शनिवार — खरना: व्रती पारंपरिक विधि-विधान से खरना करेंगे। यह छठ व्रत का महत्वपूर्ण चरण है, जिसके बाद कठिन निर्जला व्रत का क्रम शुरू होता है।
15 नवंबर, रविवार — संध्या अर्घ्य: अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। इस अवसर पर घाट पर व्रतियों और उनके परिजनों की सामूहिक उपस्थिति रहने की संभावना है।
16 नवंबर, सोमवार — प्रातःकालीन अर्घ्य: उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय महापर्व का समापन होगा।
1 नवंबर को पूजा कार्यालय का शुभारंभ
आयोजन की तैयारियों और विभिन्न गतिविधियों के समन्वय के लिए 1 नवंबर को सुबह 11 बजे छठ घाट पर पूजा कार्यालय का विधिवत शुभारंभ प्रस्तावित है। कार्यालय शुरू होने के बाद आयोजन से संबंधित जिम्मेदारियों और व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने में सहायता मिलेगी।
छठ महापर्व: आस्था से आगे सामाजिक एकजुटता का संदेश
छठ पूजा की विशेषता इसकी सादगी, अनुशासन, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक सहभागिता में निहित है। सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना से जुड़े इस पर्व में परिवार की सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना की जाती है। व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए जलाशयों और नदी तटों पर अर्घ्य अर्पित करते हैं।
बिलासपुर में विभिन्न सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं की सामूहिक भागीदारी इस आयोजन को धार्मिक अनुष्ठान के साथ सामाजिक मेल-जोल का अवसर भी बनाती है। ऐसे में आयोजन की सफलता केवल भीड़ या भव्यता से नहीं, बल्कि स्वच्छता, अनुशासन और श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं से भी आंकी जानी चाहिए।
प्रचंड प्रहार के सवाल: आस्था के आयोजन में व्यवस्था की जवाबदेही कौन निभाएगा?
छठ महापर्व के आयोजन की तैयारियों के बीच कुछ बुनियादी सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। घाट की साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी, सुरक्षित आवागमन, भीड़ प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
प्रचंड प्रहार के सवाल हैं—
- क्या आयोजन समिति और संबंधित प्रशासन घाट की व्यवस्थाओं को लेकर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करेंगे?
- नदी तट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम होंगे?
- घाट और आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने तथा पूजा सामग्री से होने वाले प्रदूषण को रोकने की व्यवस्था कौन सुनिश्चित करेगा?
- क्या यातायात, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा से संबंधित जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जाएंगी?
ये सवाल किसी अव्यवस्था का आरोप नहीं, बल्कि बड़े सार्वजनिक आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने की जरूरत की ओर ध्यान दिलाते हैं। संबंधित विभागों और आयोजन समिति की समय पर तैयारी श्रद्धालुओं के लिए राहतकारी साबित हो सकती है।
प्रचंड प्रहार की बात
बिलासपुर में 26 वर्षों से चली आ रही सामूहिक छठ परंपरा आस्था और सामाजिक एकता की विरासत है। नई समिति के सामने इस विरासत को आगे बढ़ाने के साथ आयोजन को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुशासित बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
आस्था का सम्मान तभी पूर्ण होगा, जब श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा भी प्राथमिकता बने। 13 से 16 नवंबर तक होने वाले छठ महापर्व की सफलता का वास्तविक पैमाना यही होगा कि पूजा-अर्चना के साथ व्यवस्थाएं भी अपेक्षाओं पर खरी उतरें।



