April 21, 2026 |
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लोक संस्कृति पर्व भोजली

अच्छी फसल और अटूट मित्रता का प्रतीक पर्व भोजली, 10 अगस्त को होगा उत्सव का आयोजन

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। भोजली महोत्सव छत्तीसगढ़ में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो धार्मिकता और मित्रता का संगम है। यह पर्व सावन माह के अंत तक विशेष रूप से रक्षाबंधन के बाद मनाया जाता हैं। अलग-अलग प्रदेशों में इन्हें ‘फुलरिया`, ‘धुधिया`, ‘धैंगा` और ‘जवारा`(मालवा) या भोजली भी कहते हैं।

लोकसंस्कृति का यह पारंपरिक पर्व भोजली महोत्सव कार्यक्रम प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी बड़े हर्षोल्लास से दिनांक 10.08.2025 दिन रविवार को पचरीघाट बिलासपुर में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति का भी मंचीय कार्यक्रम किया जाएगा। इस आयोजन को सफल बनाने संजोही लोक कला मंच व छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति कला मंच जोरशोर से जुटी हुई है।

यह उत्सव अच्छी फसल और अटूट मित्रता का प्रतीक है…

विदित हो कि रक्षाबंधन के पूर्व भोजली की प्राण प्रतिष्ठा कर इन्हें छोटी टोकरी या गमले में उगाया जाता हैं। गेहूं या जौ के बीज को टोकरी या गमले में बोए जाते हैं। उसे घर के किसी पवित्र स्‍थान में छायादार जगह में स्‍थापित कर इसे 7 से 9 दिनों तक पूजा जाता है। इनकी देखभाल की जाती है। दाने धीरे-धीरे पौधे बनकर बढ़ते हैं, महिलाओं के द्वारा भोजली दाई (देवी) के सम्‍मान में भोजली सेवा गीत गाये जाते हैं। सामूहिक स्‍वर में गाये जाने वाले भोजली गीत छत्‍तीसगढ की शान हैं। खेतों में इस समय धान की बुआई व प्रारंभिक निराई गुडाई का काम समापन की ओर होता है। किसानों के परिवार की महिलाएं अच्‍छी वर्षा एवं भरपूर भंडार देने वाली फसल की कामना करते हुए फसल के प्रतीकात्‍मक रूप से भोजली का आयोजन करती हैं। इसे “भोजली माता” के रूप में स्थापित किया जाता है और हर दिन हल्दी पानी का छिड़काव कर इसकी सेवा की जाती है। यह उत्सव अच्छी फसल और अटूट मित्रता का प्रतीक है। भोजली विसर्जन के दौरान, लोग एक-दूसरे के कानों में भोजली खोंसकर मित्रता का बंधन बनाते हैं, जिसे “मितानी” कहा जाता है।

भोजली उत्सव की मुख्य बातें:

मित्रता का पर्व:

भोजली उत्सव में, लोग एक-दूसरे को भोजली देकर मित्र बनते हैं और यह मित्रता जीवन भर निभाई जाती है।

फसल का प्रतीक:

भोजली को अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक महत्व:

भोजली माता की पूजा की जाती है और इसे देवी का रूप माना जाता है।

सांस्कृतिक महत्व:

यह छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भोजली उत्सव न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के लोगों के बीच एकता और भाईचारे की भावना को भी बढ़ावा देता है।

Prachand Prahar