सम्मान के मंच पर बड़ा सवाल—एक दिन या पूरे साल? सम्मान के मंच से अधिकारों तक पहुंची बात
वृद्धजन दिवस पर 500 से ज्यादा वरिष्ठजनों का स्वास्थ्य परीक्षण, सहायक उपकरण बांटे गए; अब सवाल—एक दिन का सम्मान या पूरे साल की जिम्मेदारी?

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान देने की औपचारिकता से आगे बढ़ते हुए अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर पं. देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में स्वास्थ्य, कानूनी जागरूकता और सहायक सुविधाओं को केंद्र में रखकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। विधायक धरमलाल कौशिक, कलेक्टर संजय अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधियों ने वरिष्ठजनों का शॉल, श्रीफल और पुष्पमाला से सम्मान किया। मंच से वरिष्ठजनों को समाज की अमूल्य धरोहर बताया गया और उनके अनुभवों से नई पीढ़ी को सीख लेने का संदेश दिया गया।

लेकिन कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर सम्मान समारोह से ज्यादा उन 500 से अधिक वरिष्ठजनों की रही, जिनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। आयुष विभाग के चिकित्सकों ने जांच के साथ दवाइयां वितरित कीं, जबकि मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए शुगर और ब्लड प्रेशर समेत जरूरी जांच की गई। विशेष आवश्यकता वाले वरिष्ठजनों को श्रवण यंत्र, छड़ी, नी-कैप और कमर बेल्ट जैसे सहायक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए।
सिर्फ शॉल-श्रीफल नहीं, जरूरतों पर भी बात
वरिष्ठजनों के सम्मान की तस्वीरें आसानी से आकर्षित करती हैं, लेकिन असली चुनौती तस्वीरों के बाहर है। बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, अकेलापन, कानूनी संरक्षण और डिजिटल ठगी जैसी समस्याएं भी बढ़ती हैं। यही वजह है कि कार्यक्रम में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण संबंधी कानूनी प्रावधानों से लेकर वित्तीय और स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर जागरूकता को जगह दी गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी के स्टॉल लगाए गए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संगीत के जरिए स्वस्थ तन-मन तथा सकारात्मक सोच का संदेश भी दिया गया।
बड़ा सवाल—कार्यक्रम के बाद क्या?
सरकारी आयोजनों में सम्मान, भाषण और घोषणाएं अक्सर सुर्खियां बन जाती हैं। मगर वरिष्ठ नागरिकों के लिए किसी व्यवस्था की वास्तविक उपयोगिता का आकलन इस बात से होगा कि उन्हें अपने अधिकारों, स्वास्थ्य सुविधाओं, पेंशन, कानूनी सहायता और सुरक्षा संबंधी योजनाओं का लाभ आयोजन स्थल से निकलने के बाद कितना और कितनी आसानी से मिलता है।
इस लिहाज से वृद्धजन दिवस का यह आयोजन सिर्फ एक दिन का समारोह न रहकर वरिष्ठ नागरिकों तक योजनाओं और अधिकारों की निरंतर पहुंच का माध्यम बनता है या नहीं—यह आने वाला समय तय करेगा।
अनुभवों की विरासत, व्यवस्था की परीक्षा
विधायक धरमलाल कौशिक ने वरिष्ठजनों के अनुभवों को नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बताया। महापौर पूजा विधानी और क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी ने भी उनके सम्मान और संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी और छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम अध्यक्ष राजा पाण्डेय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के एनएसएस विद्यार्थियों ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक, पेंशनर्स संगठनों के पदाधिकारी तथा स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
वरिष्ठजनों के लिए एक दिन का सम्मान निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी जिंदगी को गरिमापूर्ण बनाने की असली परीक्षा 1 अक्टूबर के बाद शुरू होती है।
“सम्मान हुआ, अब व्यवस्था की बारी!”



