
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में हुए दो बड़े डीएमएफ घोटाला और शराब घोटाले की जांच में अहम प्रगति हुई है। यह ऑपरेशन राजधानी रायपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 19 स्थानों पर एक साथ चलाया गया।
शराब और डीएमएफ घोटाले की जांच ने एक नए मोड़ का रुख किया, जब ईओडब्ल्यू और एसीबी की संयुक्त टीमों ने बिलासपुर शहर में तड़के से कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। कार्रवाई का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और बहुचर्चित शराब घोटाले के आरोपित अनिल टुटेजा के रिश्तेदार अशोक टुटेजा का दयालबंद स्थित आवास रहा, जहां टीम सुबह से दस्तावेज़ और डिजिटल रिकॉर्ड खंगालती रही।
दयालबंद क्षेत्र में तलाशी अभियान, शहर मे हलचल
शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके दयालबंद से जगमल चौक तक छापे की खबर से हलचल बनी रही। अशोक टुटेजा के दयालबंद आवास के अलावा जगमल चौक और गोलबाजार क्षेत्र में भी तलाशी अभियान चलाया गया। टीमों ने घरों और कारोबारी प्रतिष्ठानों से वित्तीय कागज़, रजिस्ट्री दस्तावेज़, मोबाइल डेटा और डिजिटल स्टोरेज की गहन पड़ताल की। इस दौरान कई परिसरों की बाहरी सुरक्षा बढ़ा दी गई ।
कई ठिकाने जांच की रडार पर, किन पर हुई रेड ?
बिलासपुर में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अशोक टुटेजा के ठिकानों पर छापा सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले 10–15 वर्षों में अशोक टुटेजा ने बिलासपुर व रायपुर में करोड़ों की जमीनें और कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदी हैं, जिसकी जांच एसीबी की प्राथमिकता में है। कार्रवाई के दायरे में डीएमएफ घोटाले से जुड़े हरपाल अरोड़ा, और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के रायपुर स्थित ठिकाने भी शामिल हैं। हरपाल सिंह अरोड़ा के निजी और कारोबारी नेटवर्क से जुड़े 11 ठिकानों पर कार्रवाई की गई. वहीं शराब घोटाले से जुड़े जेल में बंद आरोपियों अनिल टुटेजा और निरंजन दास से जुड़े 8 ठिकानों पर छापे पड़े. जब्त सामग्री की फोरेंसिक जांच के बाद आरोपियों की भूमिका और स्पष्ट होगी तथा आगे गिरफ्तारी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता. सरगुजा क्षेत्र में डॉ. तनवीर अहमद और सप्लायर अमित अग्रवाल के यहां भी ईओडब्ल्यू–एसीबी की टीमें दबिश दे चुकी हैं । माना जा रहा है कि इन सभी ठिकानों से बरामद दस्तावेज घोटाले के नेटवर्क को समझने में बड़ी कड़ी साबित हो सकते हैं।
आबकारी अफसरों पर भी “तिरछी नज़र”
सूत्रों के अनुसार, आज की कार्रवाई के बाद बिलासपुर से लेकर पूरे प्रदेश के आबकारी अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों पर भी ईओडब्ल्यू – एसीबी की “तिरछी नज़र” बनी हुई है। माना जा रहा है कि यह घोटाला कई स्तरों पर फैला हुआ है और छापेमारी पूरी होने के बाद जांच एजेंसी महत्वपूर्ण खुलासे कर सकती है। कई अधिकारी आंतरिक निगरानी में हैं और एजेंसी ने उनकी गतिविधियों का प्रारंभिक विश्लेषण भी शुरू कर दिया है।



