
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
राजस्व कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सोशल मीडिया पर ₹25 हजार की कथित रिश्वत मांगने और लेने से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तहसीलदार पचपेड़ी की जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

कलेक्टर कार्यालय के 29 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार, संबंधित पटवारी का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत तथा गंभीर कदाचरण की श्रेणी में माना गया है। आदेश में शासकीय कार्यप्रणाली और शासन की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का भी उल्लेख है।
सात दिन में आरोप पत्र, विभागीय कार्रवाई अब अगली परीक्षा
तहसीलदार पचपेड़ी ने 28 अक्टूबर 2026 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था। इसके आधार पर कलेक्टर ने निलंबन का आदेश जारी करते हुए संबंधित पटवारी के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर सात दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
निलंबन अवधि में ऋषिपुरी गोस्वामी का मुख्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, कोटा कार्यालय निर्धारित किया गया है। आदेश के मुताबिक, उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
निलंबन हुआ, लेकिन जवाबदेही की कसौटी अभी बाकी
इस कार्रवाई ने राजस्व विभाग में कथित रिश्वतखोरी और आम नागरिकों के शासकीय कामकाज को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, निलंबन को अंतिम दंड या आपराधिक दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। अब विभागीय जांच में आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित कर्मचारी के पक्ष का नियमानुसार परीक्षण होना बाकी है।
प्रचंड प्रहार के सवाल:
- क्या विभागीय जांच निर्धारित समयसीमा में पूरी कर निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचेगी?
- क्या कथित रिश्वत प्रकरण में उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों की विधिवत जांच की जाएगी?
- क्या जांच में आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार ठोस कार्रवाई होगी, या मामला केवल निलंबन तक सीमित रह जाएगा?
- आम नागरिकों के राजस्व संबंधी कामकाज में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विभाग क्या व्यवस्था करेगा?
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क की नजर: निलंबन कार्रवाई की शुरुआत है, अंतिम निष्कर्ष नहीं। असली कसौटी यह होगी कि विभागीय जांच कितनी निष्पक्षता और समयबद्धता से पूरी होती है तथा साक्ष्यों के आधार पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है। सरकारी दफ्तरों में जवाबदेही केवल आदेश जारी करने से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई से स्थापित होती है।
खबर वही, जो असर करें!
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।



