कैबिनेट का फैसला: PWD ठेकेदारों को डामर पर राहत, नगर निगम की सड़कों पर चुप्पी! बेलतरा की बदहाली कब होगी दूर? – अंकित गौरहा
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा का आरोप—तीन साल से सड़कें जर्जर, स्वीकृति और भूमिपूजन के दावों के बीच निर्माण अधूरा • कैबिनेट ने पात्र PWD अनुबंधों को डामर मूल्यवृद्धि पर राहत दी, नगर निगम की सड़कों पर व्यवस्था को लेकर सवाल • गौरहा ने उठाई स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की जवाबदेही की मांग

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में बदहाल सड़कें और अधूरे निर्माण अब राजनीतिक सवालों के केंद्र में हैं। कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सभापति अंकित गौरहा ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि क्षेत्र में ‘मेवा सदन की संस्कृति’ हावी है, जबकि आम जनता की समस्याएं पीछे छूट गई हैं। उनका कहना है कि पिछले तीन वर्षों से सड़कें जर्जर हैं। स्वीकृति, भूमिपूजन और निरीक्षण की प्रक्रियाओं की चर्चा होती रही, लेकिन जनता को यह स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा कि निर्माण कब पूरा होगा और देरी की जिम्मेदारी कौन लेगा।

डामर पर राहत का फैसला, बेलतरा की सड़कों को राहत कब?
छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद के 27 अक्टूबर 2026 के निर्णय में छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण और लोक निर्माण विभाग के पात्र अनुबंधों के लिए डामर की कीमतों में बढ़ोतरी के मद्देनजर मूल्य राहत का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत निर्धारित अवधि में उपयोग किए गए डामर की मात्रा के आधार पर 130.88 करोड़ रुपये की राहत का उल्लेख है।
इस फैसले के बाद गौरहा के उठाए सड़क संबंधी सवालों को नई प्रासंगिकता मिली है। नगर निगम क्षेत्र की सड़क परियोजनाओं पर समान राहत की व्यवस्था है या नहीं, इसे लेकर स्पष्टता जरूरी है।
करोड़ों की सड़कें, फिर भी जनता परेशान
बेलतरा क्षेत्र की कई प्रमुख सड़कों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- अशोक नगर–बिरकोना पहुंच मार्ग: लगभग 17 करोड़ रुपये।
- गुरुनानक चौक–राजकिशोर नगर पहुंच मार्ग: लगभग 9 करोड़ रुपये।
- अपोलो चौक–रपटा पहुंच मार्ग: लगभग 10 करोड़ रुपये।
- साइंस कॉलेज–सब्जी मंडी पहुंच मार्ग: लगभग 3 करोड़ रुपये।
- बायपास सहित अन्य सड़कें: निर्माण और मरम्मत की स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग।
उल्लिखित लागत के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक होना जरूरी है। गौरहा का सवाल है कि जब सड़कें आम लोगों के रोजमर्रा के आवागमन से जुड़ी हैं, तो उनकी बदहाली दूर करने के लिए ठोस समय-सीमा क्यों सामने नहीं आती?
जर्जर सड़कों से आवागमन प्रभावित होने, दुर्घटनाओं की आशंका और नागरिकों को परेशानी होने के बीच संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन सड़कों का निर्माण लंबित है, कहां भुगतान या अनुबंध संबंधी अड़चन है और काम पूरा करने की जिम्मेदारी किस एजेंसी की है।
PWD से नगर निगम को सड़क हस्तांतरण पर सवाल
अशोक नगर–बिरकोना मार्ग को लेकर गौरहा और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों में विभागीय हस्तांतरण का मुद्दा भी शामिल है। आरोप है कि पहले लोक निर्माण विभाग के अधीन रही सड़क को नगर निगम को हस्तांतरित किए जाने के बाद निर्माण कार्य प्रभावित हुआ और सड़क की समस्या बनी रही।
इस मामले में गौरहा के सवालों का जवाब संबंधित विभागों के दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकेगा। सड़क हस्तांतरण कब हुआ, उस समय निर्माण की स्थिति क्या थी, किस एजेंसी को आगे काम पूरा करना था और अब तक कितनी प्रगति हुई—इन बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है।
यदि विभागीय हस्तांतरण के कारण जिम्मेदारी या कार्ययोजना में कोई बाधा आई है, तो उसका निराकरण कौन करेगा? और यदि निर्माण में देरी के दूसरे कारण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? सड़क की जिम्मेदारी तय करने और समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित करने की मांग अब महत्वपूर्ण हो गई है।
‘मेवा सदन की संस्कृति’ पर गौरहा का हमला
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि बेलतरा क्षेत्र में ‘मेवा सदन की संस्कृति’ हावी है और स्थानीय जनप्रतिनिधि आम जनता की समस्याओं के बजाय व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्षेत्र की सड़कें वर्षों से बदहाल हैं, फिर भी निर्माण कार्य पूरा करने की स्पष्ट जवाबदेही क्यों तय नहीं हो रही?
गौरहा के अनुसार, स्वीकृति, भूमिपूजन, निरीक्षण और परीक्षण जैसी प्रक्रियाओं का हवाला दिया जाता है, लेकिन आम नागरिकों को सबसे जरूरी जानकारी—काम कब पूरा होगा—नहीं मिल रही है।
उनका आरोप है कि क्षेत्र की जनता सड़क की परेशानी झेल रही है, जबकि जिम्मेदार लोगों की ओर से स्पष्ट समय-सीमा और ठोस कार्ययोजना सामने नहीं आ रही। गौरहा ने सवाल उठाया कि जब जनता रोजाना बदहाल सड़कों से गुजरने को मजबूर है, तब सदैव मुखर रहने वाले जिम्मेदार लोग मौन क्यों हैं?
ये आरोप कांग्रेस नेता के बयान पर आधारित हैं। संबंधित जनप्रतिनिधि और विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।
गौरहा के सवाल—जवाबदेही तय होगी या जनता इंतजार करती रहेगी?
बेलतरा की सड़कों को लेकर अब केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। निर्माण की वास्तविक स्थिति, विभागीय जिम्मेदारी और काम पूरा करने की समय-सीमा सार्वजनिक होना जरूरी है।
प्रचंड प्रहार के सवाल:
- तीन वर्षों से बदहाल बताई जा रही सड़कों के निर्माण की वर्तमान स्थिति क्या है?
- अशोक नगर–बिरकोना मार्ग को PWD से नगर निगम को हस्तांतरित करने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया?
- नगर निगम क्षेत्र की पात्र सड़क परियोजनाओं को डामर मूल्यवृद्धि पर राहत देने की क्या व्यवस्था है?
- अधूरे निर्माण और मरम्मत में देरी के लिए जवाबदेही किस अधिकारी या एजेंसी की तय होगी?
- स्थानीय जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग सड़क निर्माण पूरा करने की निश्चित समय-सीमा कब सार्वजनिक करेंगे?
जनता को चाहिए सड़क, सिर्फ आश्वासन नहीं
अंकित गौरहा के आरोपों ने बेलतरा क्षेत्र में सड़क निर्माण, विभागीय जिम्मेदारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इन सवालों का समाधान राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि आधिकारिक दस्तावेजों, निर्माण की प्रगति और तय समय-सीमा के सार्वजनिक होने से होगा।
बेलतरा की जनता का सवाल साफ है—सड़कें बदहाल क्यों हैं, निर्माण में देरी की जिम्मेदारी कौन लेगा और राहत आखिर कब मिलेगी?
खबर वही, जो असर करें!
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।



