June 6, 2026 |
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भ्रष्टाचार की हदें पार ? 27 घण्टे पुलिस अभिरक्षा में रखे कोल माफिया को थानेदार ने छोड़ दिया, 22 लाख रूपये रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग, आईजी से शिकायत, पूरा माजरा सीसीटीवी कैमरे में कैद

सनसनीखेज मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग, आईजी से शिकायत 

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/रायपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद कुछ मामलों में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ जाती है। ताजा मामला कोल लेवी से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसमें बलौदा थाना प्रभारी रितेश मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि कोल माफिया विशाल गोविन्दानी को गिरफ्तार कर हथकड़ी लगाने और लगभग 27 घंटे तक पुलिस अभिरक्षा में रखने के बाद 22 लाख रुपये की रिश्वत लेकर उसे छोड़ दिया गया।

ग्राम झल्फा, जिला बिलासपुर निवासी कैलाश यादव वर्तमान में लोखंडी स्थित सी.पी.सी.एल. कोल डिपो में चौकीदारी का कार्य करते हैं। इससे पहले वे रतनपुर नेशनल हाईवे स्थित मां तारा कोल डिपो में चौकीदार थे। दिनांक 5 मार्च 2026 को बलौदा थाना पुलिस ने सी.पी.सी.एल. डिपो से कैलाश यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार बलौदा थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 1122 में नाम सामने आने पर उन्हें बीएनएस की धारा 3(5), 308(3), 316(5), 318(3), 318(4) के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया और जेल भेज दिया गया। हालांकि जेल से जमानत पर छूटने के बाद कैलाश यादव ने पूरे मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

डिपो संचालक हुए मुक्त, विकलांग चौकीदार पहुंच गया जेल

पीड़ित कैलाश यादव का कहना है कि बलौदा थाना प्रभारी रितेश मिश्रा ने उनसे उनके पूर्व मालिक विशाल गोविन्दानी के संबंध में पूछताछ की। चूंकि वे पहले रतनपुर स्थित मां तारा डिपो में चौकीदारी करते थे, इसलिए उन्हें विशाल गोविन्दानी के बारे में जानकारी थी। पूछताछ के बाद पुलिस ने विशाल गोविन्दानी को उनके निवास हंसा विहार कॉलोनी, बिलासपुर से पकड़कर बलौदा थाना लाया। कैलाश यादव के अनुसार उन्हें, विशाल गोविन्दानी और एक अन्य व्यक्ति जुबेर अंसारी को हथकड़ी लगाकर थाना में रखा गया।

लेकिन अगले दिन 6 मार्च 2026 की सुबह लगभग 9 बजे विशाल गोविन्दानी की हथकड़ी खोलकर उसे पुलिस अभिरक्षा से मुक्त कर दिया गया, जबकि कैलाश यादव और जुबेर अंसारी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। दिनांक 11 मार्च 2026 को कैलाश यादव को जिला न्यायालय से जमानत मिल गई, जिसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने का निर्णय लिया।

सेठ जी को छोड़ दिया और मुझे बना दिया बलि का बकरा

पीड़ित का आरोप है कि उन्हें बाद में जानकारी मिली कि थाना प्रभारी ने 22 लाख रुपये रिश्वत लेकर विशाल गोविन्दानी को छोड़ दिया। उनका कहना है कि वे केवल एक साधारण चौकीदार हैं और हाथ से विकलांग भी हैं, फिर भी उन्हें गलत तरीके से इस मामले में फंसाकर मैनेजर बताकर जेल भेज दिया गया।

कैलाश यादव का कहना है कि डिपो का मैनेजर बनने के लिए नगद लेनदेन और हिसाब-किताब संभालना पड़ता है, जो उनके लिए शारीरिक रूप से संभव नहीं है। इसके बावजूद उन्हें मुख्य आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया, जबकि डिपो संचालक को छोड़ दिया गया।

सीसीटीवी फुटेज से खुल सकता है पूरा सच

पीड़ित ने दावा किया है कि बलौदा थाना में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हो सकती है। यदि उन फुटेज की जांच कराई जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि विशाल गोविन्दानी को थाना में कब लाया गया और कब छोड़ा गया।

विकलांग चौकीदार को बना दिया मैनेजर

कैलाश यादव हाथ से विकलांग हैं और नगद राशि गिनने या प्रबंधन का कार्य करने में असमर्थ हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें डिपो का मैनेजर बताते हुए जेल भेज दिया, जबकि उनके मेमोरेंडम बयान में डिपो संचालक के रूप में विशाल गोविन्दानी का नाम दर्ज होने के बावजूद उन्हें छोड़ दिया गया।

कोल कारोबार में लाइसेंस के नाम पर खेल

सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ में कई कोल डिपो ऐसे हैं जिनके लाइसेंस वास्तविक संचालकों के नाम पर नहीं हैं। बताया जाता है कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कोल कारोबारी अक्सर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस लेकर डिपो संचालित करते हैं। मां तारा डिपो का लाइसेंस भी सूर्य प्रकाश गुप्ता के नाम पर बताया जाता है, जबकि कर्मचारियों के अनुसार वास्तविक संचालन विशाल गोविन्दानी करते हैं।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित कैलाश यादव ने रायपुर स्थित आईजी कार्यालय में लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। एआईजी चंचल तिवारी ने उन्हें मामले की जांच का आश्वासन दिया है।अब देखने वाली बात यह होगी कि कोल लेवी से जुड़े इस गंभीर मामले में आरोपों की जांच के बाद पुलिस विभाग क्या कार्रवाई करता है।

Prachand Prahar

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