April 17, 2026 |
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जमीन घोटाला

यत्र – तत्र – सर्वत्र ! @ जमीन घोटाले की गूंज…

सरकारी जमीन को निजी बनाने वाले राजस्व अधिकारी और भू-माफियाओं के खिलाफ केंद्र सरकार से शिकायत

खसरा क्रमांक 993 की सरकारी जमीन घोटाले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग

मोपका में चलेगा बुलडोजर, सरकारी जमीन के अभिलेख होंगे दुरुस्त ?

प्रचंड प्रहार न्यूज/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भू-उपयोग की अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में क्या राजस्व अधिकारी बेलगाम हो गए हैं ? दरअसल न्यायधानी बिलासपुर में नियम कायदों को ताक में रखकर शासकीय मद की जंगल भूमि जो कि मिशल बंदोबस्त में दर्ज है। जिसका रकबा लगभग 200 हेक्टेयर से भी अधिक है। जिसकी कीमत करोड़ों रुपए की बताई जा रही है। उक्त सरकारी जमीन की बंदरबांट कर दी गई? विदित हो कि फर्जी तथा नियम विरुद्ध पट्टा जारी कर उक्त सरकारी जमीन को निजी बनाने वाले राजस्व अधिकारी और भू-माफियाओं के खिलाफ केंद्र सरकार से शिकायत की गई है।

शासकीय भूमि के बंदरबांट में अब तक जांच लंबित

बिलासपुर तहसील अंतर्गत रा. नि./मोपका, पटवारी हल्का क्रमांक 29, ग्राम मोपका, खसरा नम्बर 993 के सरकारी जमीन घोटाला की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने माननीय प्रधानमंत्री के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के समक्ष निवेदन/ शिकायत पत्र प्रेषित कर उचित कार्यवाही की मांग की गई है। बताते चलें कि केन्द्र सरकार से की गई इस शिकायत पत्र में बताया गया है कि नगर पालिक निगम बिलासपुर तहसील अंतर्गत ग्राम मोपका पटवारी हल्का क्रमांक 29, खसरा नम्बर 993 जो कि शासकीय मद की जंगल भूमि के रूप में मिशल बंदोबस्त में दर्ज है। उपरोक्त शासकीय भूमि को देश के संविधान (भू – राजस्वसंहिता) के विरुद्ध निजी भूमि घोषित किया गया एवं क्रय – विक्रय किया गया है। जिसके खिलाफ शासन के आदेशानुसार जांच भी कराया गया, लेकिन कई वर्षों के उपरांत भी घोटाला/शासकीय भूमि के बंदरबांट जैसे बड़े मामले में अब तक जांच लंबित हैं ।

बिना अनुमति के ही शासकीय खसरे की भूमि का क्रय – विक्रय

आवेदन में बताया गया है कि यह भू – भाग बड़े झाड़ एवं छोटे झाड़ की जंगल भूमि है। बिलासपुर में अनेकों भू – माफियाओं ने उपरोक्त उल्लेखित सैकड़ों एकड़ बेशकीमती शासकीय भूमि को ग्रामीणों के नाम पर राजस्व अभिलेखों में नियम विरुद्ध दर्ज कराकर बाद में अपने नाम पर रजिस्ट्री/पंजीयन करा लिया है। बिना अनुमति के ही शासकीय खसरे की भूमि का क्रय – विक्रय/रजिस्ट्री पंजीयन कराया गया है। उपरोक्त खसरे की कई जमीन का जिस दिन रजिस्ट्री/पंजीयन हुआ उसके दूसरे ही दिन राजस्व अधिकारियों ने नामांतरण आदेश किया है। जिसकी पुष्टि भी शासन के आदेश पर प्रशासनिक तौर पर हो चुका हैं। आरोप है कि इसके बावजूद जांच का हवाला देकर छोटे भू – माफियाओं पर ही कार्यवाही कर मामले को रफादफा किया जा रहा है जबकि असल बड़े रसूखदार भू – माफिया जिन्हें नेताओं का संरक्षण भी प्राप्त है उन पर कार्यवाही आज तक पूर्ण नहीं की जा सकी है।

दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नहीं की जा सकी ठोस कार्यवाही

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में भी जांच दल गठन कर जांच कराया गया, इसके बावजूद दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा सकी है। उपरोक्त उल्लेखित शासकीय खसरे की भूमि/रकबा से भूमाफियों के नाम को विलुप्त/संशोधन कर शासकीय भूमि को शासन के आधिपत्य में पुनः दर्ज/सत्यापन नहीं किया गया है । पत्र में बताया गया है कि शासकीय भूमि को मोपका निवासी कई ग्रामीणों के नाम केवल और केवल भू – माफियों के नाम पर बाद में दर्ज करने के लिए नाम मात्र के लिए राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया गया है। उक्त शासकीय भूमि को किसी भी रिकॉर्ड शाखा में संधारित नहीं किया गया है। ताकि शासकीय मद की भूमि को आसानी से खपाकर करोड़ो रूपये कमा सके।

अवैध प्लाटिंग, शादी भवन सहित कई कालोनी भी तैयार

इस अवैध गतिविधियों को रोकने शिकायतकर्ता ने खसरा क्रमांक 993 रकबा लगभग 200 हेक्टेयर के अंशभाग में काबिज़ समस्त भूस्वामियों/भू- माफियों के राजस्व अभिलेखों की जांच तथा राजस्व अभिलेखों में पुनः सरकारी जमीन दर्ज करने केंद्र सरकार को शिकायत पत्र सौंपा है। जिससे जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्यवाही होने की उम्मीद जताई है। बताया जा रहा है कि इसी खसरे नम्बर पर अवैध प्लाटिंग, शादी भवन सहित कई कालोनी भी बन गए है । जिन पर अब बुलडोजर कार्यवाही होना लगभग तय माना जा रहा है। क्योंकि भारतीय संविधान सबके लिए एक है फिर चंद भू- माफियाओं के लिए भारत का कानून बदलने वाला नहीं ?

उक्त मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने भाजपा की केंद्र सरकार से केन्द्रीय जांच टीम गठित कर उचित कार्यवाही करने की मांग करते हुए करोड़ों रुपए कीमती शासकीय भूमि के घोटाला/बंदरबांट को रोककर भाजपा के सुशासन सरकार के परचम लहराने की आस लगाई है।

Prachand Prahar