अरपांचल में आयोजन की रोशनी, विकास पर अंधेरा!
रावण दहन के लिए अरपांचल याद आया, तो सालों से अटकी अलग नगर निगम की मांग क्यों नहीं? जलभराव और बदहाल व्यवस्था पर जिम्मेदार कब देंगे जवाब?

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
अरपा पार का अरपांचल अब सिर्फ चुनावी भाषणों, सरकारी आयोजनों और राजनीतिक दावों में याद आने वाला इलाका नहीं रहना चाहिए। सवाल यह है कि जब किसी बड़े आयोजन के लिए अरपांचल शहर का अहम हिस्सा नजर आता है, तो स्थायी विकास और प्रशासनिक व्यवस्था के सवाल पर यही इलाका क्यों हाशिए पर चला जाता है?

अलग नगर निगम की मांग फिर उठी है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी विजय केशरवानी ने सरकार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाया है। उनका तर्क है कि यदि अरपांचल को सरकारी आयोजन के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है, तो फिर उसकी अलग प्रशासनिक पहचान और बेहतर नागरिक सुविधाओं पर फैसला क्यों नहीं?
आयोजन एक दिन का, समस्याएं 365 दिन की
रावण दहन या कोई बड़ा आयोजन कुछ घंटों का हो सकता है। लेकिन अरपांचल के नागरिकों की समस्याएं मौसमी नहीं हैं।
जलभराव, ड्रेनेज, सड़क, सफाई, यातायात और बुनियादी नागरिक सुविधाओं का सवाल हर साल सामने आता है। भारी बारिश में जलभराव की समस्या ने पूरे बिलासपुर में शहरी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। स्वयं हाईकोर्ट के समक्ष नगर निगम ने जलभराव से निपटने के लिए फ्लड कंट्रोल सेल, ड्रेनेज सफाई और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी दी है।
तो फिर सवाल अरपांचल के लिए भी सीधा है—
स्थायी समाधान कब?
अलग नगर निगम सिर्फ राजनीतिक नारा या प्रशासनिक जरूरत?
अलग नगर निगम बनना चाहिए या नहीं, यह फैसला भावनाओं से नहीं बल्कि जनसंख्या, क्षेत्रफल, राजस्व क्षमता, प्रशासनिक व्यवहार्यता और नागरिक सुविधाओं जैसे ठोस मानकों पर होना चाहिए।
लेकिन वर्षों से उठ रही मांग पर यदि सरकार की स्पष्ट नीति या सार्वजनिक रोडमैप सामने नहीं आता, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या अरपांचल को अलग नगर निगम की जरूरत नहीं है?
अगर जरूरत है तो प्रक्रिया कहां तक पहुंची?
अगर जरूरत नहीं है तो सरकार स्पष्ट कारण बताए।
और अगर मामला विचाराधीन है तो समयसीमा क्या है?
सिर्फ मंच पर अरपांचल नहीं, बजट और मास्टर प्लान में भी चाहिए
अरपांचल को आयोजन स्थल के रूप में पहचान मिलना अच्छी बात है। लेकिन असली विकास तब माना जाएगा जब यहां के नागरिकों को बारिश में पानी से बचने के लिए नाव नहीं, बेहतर ड्रेनेज मिले; सड़कों पर सिर्फ आयोजन की सजावट नहीं, सालभर की टिकाऊ व्यवस्था मिले।
जनता को अब उद्घाटन, आयोजन और आश्वासन से ज्यादा स्थायी काम और जवाबदेही चाहिए।
प्रचंड प्रहार का सीधा सवाल—
अरपांचल अगर शहर का हिस्सा है तो विकास में बराबरी कब?
और अगर अलग नगर निगम की मांग जायज नहीं है, तो जिम्मेदार सार्वजनिक रूप से कारण बताने से क्यों बच रहे हैं?
अरपांचल को कार्यक्रमों में याद करना आसान है।
उसे विकास की प्राथमिकता बनाना असली परीक्षा है।



