October 23, 2026 |
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“निगम में सामान्य सभा… और अंदर ACB का ट्रैप! 10 हजार लेते कर्मचारी पकड़ा गया, सम्पदा शाखा पर उठे सवाल।”

मकान नवीनीकरण से जुड़े काम को आगे बढ़ाने के एवज में रकम मांगने का आरोप; सम्पदा शाखा की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर। नगर निगम में शुक्रवार को सामान्य सभा की बैठक के बीच उस समय हलचल मच गई, जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सम्पदा शाखा में पदस्थ कर्मचारी लक्ष्मीकांत कोका के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई की। मिली जानकारी अनुसार, कर्मचारी को 10 हजार रुपए की कथित रिश्वत लेते मौके पर पकड़ा गया। मामला राजकिशोर नगर निवासी एक व्यक्ति के मकान नवीनीकरण से जुड़े काम से संबंधित बताया जा रहा है।

एसीबी को दी गई शिकायत के मुताबिक, शिकायतकर्ता अपने मकान के नवीनीकरण संबंधी कार्य के लिए निगम की सम्पदा शाखा पहुंचा था। आरोप है कि संबंधित काम को आगे बढ़ाने के एवज में उससे 10 हजार रुपए की मांग की गई। शिकायत के बाद एसीबी ने कथित मांग का सत्यापन कराया और इसके बाद ट्रैप की कार्रवाई की। शुक्रवार को शिकायतकर्ता तय रकम लेकर निगम कार्यालय पहुंचा। रकम दिए जाने के बाद टीम ने कर्मचारी को पकड़ लिया। इसके बाद कथित रिश्वत राशि, शिकायत और संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।

सवाल सिर्फ 10 हजार का नहीं, व्यवस्था की निगरानी का भी

सबसे अहम पहलू यह है कि कार्रवाई उस समय हुई, जब नगर निगम में सामान्य सभा चल रही थी। यानी निगम के भीतर सार्वजनिक रूप से चल रही महत्वपूर्ण बैठक के बीच ही उसकी एक शाखा में एसीबी की कार्रवाई हुई। इससे निगम की आंतरिक निगरानी, शिकायत निवारण व्यवस्था और नागरिक सेवाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, एसीबी की कार्रवाई अपने आप में आरोपों का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं है। कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में ही होगी। फिलहाल मामला एसीबी की कार्रवाई और जांच के दायरे में है।

“अब निगाह इस बात पर भी रहेगी कि निगम प्रशासन इस प्रकरण के बाद सम्पदा शाखा की कार्यप्रणाली, लंबित आवेदनों और नागरिकों से जुड़े कामों की प्रक्रिया की समीक्षा करता है या नहीं। क्योंकि सवाल केवल एक कर्मचारी पर लगे कथित रिश्वत के आरोप का नहीं, बल्कि ऐसी शिकायतों की रोकथाम के लिए संस्थागत व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसका भी है।”

Prachand Prahar

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