June 10, 2026 |
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शासकीय जमीन पर कब्जा

मां महामाया की नगरी रतनपुर की 165 एकड़ शासकीय जमीन पर कब्जा: आस्था और विकास दोनों खतरे में ?

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर। वर्तमान समय में “सोशल मीडिया” अपनी बातों को रखने का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है। लोगों को यह एक ऐसा मंच मिल गया है, जहां वह बेबाकी से अपनी बात अन्य लोगों तक आसानी से पहुंचा सकते हैं और साथ ही उन विषयों पर आमजनों की क्रिया – प्रतिक्रिया भी जान सकते हैं। जिसके फलस्वरूप अब इन सोशल साइट्स पर लोगों के निजी विचारों के अलावा, देश , राज्य, समाज में हो रहे भ्रष्टाचार, अनाचार और रसूखदारों के छुपे हुए राज भी उजागर होने लगे हैं और यही कारण हैं कि ऐसे मुद्दों को प्रशासनिक, सरकारी महकमों को संज्ञान में लेना लाजिमी हो जाता है। क्योंकि यह लोकतंत्र की आवाज होती हैं। ऐसी ही एक आवाज मां महामाया की नगरी रतनपुर से निकलकर सोशल मीडिया में तैर रही है।

यह सिर्फ कानून का नहीं, आस्था और भविष्य का भी अतिक्रमण

मामले की जानकारी देते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नीरज जायसवाल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट में पोस्ट के माध्यम से बताया है कि मां महामाया की नगरी रतनपुर आज अतिक्रमण की चपेट में है। अनुमान के अनुसार यहां लगभग *165 एकड़* शासकीय जमीन पर बेतहाशा बेजा कब्जा किया जा चुका है। उन्होंने कहा चिंता की बात यह है कि ये कब्जे सिर्फ खाली पड़े मैदानों पर नहीं, बल्कि *तालाबों के पार, श्मशान घाट, स्कूल भवन के सामने* और अन्य सार्वजनिक जगहों पर किए गए हैं। शर्मनाक स्थिति तो यह है कि इसमें *राम मंदिर की जमीन* भी प्रमुख रूप से शामिल है। जिस जमीन पर बच्चों को खेलना था, जहां तालाब का पानी रुकना था, जहां श्मशान की शांति थी, जहां राम मंदिर का विस्तार होना था – आज वहां अवैध निर्माण खड़े हैं। यह सिर्फ कानून का नहीं, हमारी आस्था और भविष्य का भी अतिक्रमण है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों  पर तंज कसते हुए सवाल भी किया और समाधान भी बताया है।

1.सवाल सीधा है:

रतनपुर के जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर मुद्दे पर अब तक कितने आवेदन दिए ? कितनी बार कलेक्टर, एसडीएम या मंत्रालय तक बात पहुंचाई? जनता को जवाब चाहिए। अगर चुने हुए नुमाइंदे चुप हैं तो कहीं न कहीं उनकी सहमति भी मानी जाएगी।

2.समाधान सामने है:

सरकार यदि इन 165 एकड़ कब्जे वाली जमीनों को तत्काल खाली कराकर नियमानुसार लीज पर दे दे, तो नगर पालिका परिषद रतनपुर को हर साल *लाखों रुपये की स्थायी आय* होगी। यह पैसा नाली, सड़क, लाइट, पानी और सफाई में लगेगा। आज पालिका बजट के लिए तरसती है, कल यही जमीनें उसकी सबसे बड़ी ताकत बनेंगी। पर दुख की बात ये है कि आय के दूसरे स्रोत भी ठप हैं। *मवेशी बाजार वर्षों से बंद* पड़ा है। *निर्यात कर* से एक रुपया नहीं आ रहा। *नौका विहार* जैसी पर्यटन की योजना सिर्फ कागजों पर है। क्या इन सबको चालू कराने के लिए किसी जनप्रतिनिधि ने एक भी आवेदन दिया ? क्या कोई फाइल आगे बढ़ी? रतनपुर की जनता यह जानना चाहती है। उन्होंने कहा जनप्रतिनिधि जागें, प्रशासन कार्रवाई करे और जनता आवाज बुलंद करे।

Prachand Prahar