October 24, 2026 |
Search
Close this search box.

BREAKING NEWS

बस्तर दशहरा लोकतंत्र की मिसाल, माओवाद के बाद विकास की अग्निपरीक्षा! राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश, अब जमीन पर बदलाव की बारीदो रावण दहन, दो हादसे… सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल? अब जवाबदेही की अग्निपरीक्षा!अनुशासन की कदमताल, संगठन की ताकत! संजीवनी प्रभात शाखा का पथ संचलन संपन्नअरपा में बढ़ सकता है जलस्तर, विसर्जन में लापरवाही पड़ सकती है भारी!माता के दरबार में जात-पात नहीं, सिर्फ भक्तों की पहचान! त्रिलोक चंद्र श्रीवास का सामाजिक समरसता का संदेशपत्नी के सम्मान और संघर्ष की कहानी, अशोक व्यास की 15वीं पुस्तक ‘एक पत्नी पर पुस्तक क्यों?’ का विमोचनगौवंश के पेट में पन्नी, नालियों में प्लास्टिक, पानी में जहर का खतरा! प्रतिबंध के बावजूद लगाम कहां?महामाया के दरबार में भूपेश बघेल की आस्था, बिलासपुर में कांग्रेस नेताओं का आत्मीय स्वागत; सियाराम कौशिक से मुलाकात और मस्तूरी में जागरण में हुए शामिलआस्था की ध्वज यात्रा या राजनीतिक संदेश? अंकित गौरहा ने विधायक सुशांत शुक्ला से मांगा जवाबअपोलो से जुड़ी मेडिकल कचरा जलाने की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता, लिंगियाडीह के रहवासी परेशान
छत्तीसगढ़देशधार्मिक

गज पर सवार होकर आई मां दुर्गा! 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ पर्व का समापन

हाथी पर देवी के आगमन को सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा की लोकमान्यता से जोड़ते हैं श्रद्धालु; घटस्थापना की सामग्री, सरल पूजा-विधि और मां के नौ स्वरूपों की आराधना का पूरा विवरण

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क, बिलासपुर।

बिलासपुर/रतनपुर। शंखनाद, मंत्रोच्चार, धूप-दीप की सुगंध और मां भगवती के जयकारों के बीच शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर 2026, रविवार से प्रारंभ हो रहा है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना, व्रत, साधना और भक्ति से जुड़ा यह महापर्व श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मसंयम और नई सकारात्मक शुरुआत का अवसर है। छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध धार्मिक नगरी रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर सहित देवी मंदिरों में इस अवसर पर विशेष श्रद्धा और उत्साह का वातावरण रहता है।

इस वर्ष नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। रतनपुर के भैरव मंदिर के महंत पंडित जागेश्वर अवस्थी ने इस धार्मिक मान्यता का उल्लेख किया है। पारंपरिक मान्यता में देवी के हाथी पर आगमन को अच्छी वर्षा, सुख-समृद्धि, खुशहाली और कृषि की उन्नति से जोड़कर देखा जाता है। भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, स्थिरता, गरिमा और समृद्धि का प्रतीक है। ऐसे में मां भगवती के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं के मन में विशेष उत्साह और शुभकामनाओं का भाव है।

हाथी पर मां का आगमन, समृद्धि की कामना से जुड़ी मान्यता

नवरात्रि के दौरान देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन का निर्धारण सप्ताह के वार के आधार पर करने की परंपरा प्रचलित है। इसी मान्यता के अनुसार रविवार को नवरात्रि आरंभ होने पर देवी का वाहन हाथी बताया जाता है।

लोकविश्वास में हाथी पर देवी के आगमन को अनुकूल वर्षा, अच्छी फसल और आर्थिक खुशहाली की कामना से जोड़ा गया है। कृषि प्रधान समाज में वर्षा को अन्न, आजीविका और समृद्धि का आधार माना जाता रहा है। इसी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए शुभ संकेत का प्रतीक बनी हुई है।

आस्था का संदेश यही है—मां भगवती से केवल अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि समूचे समाज के सुख, शांति, अन्न-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की जाए।

दस कैलेंडर दिनों में फैलेगा नवरात्रि पर्व

11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के साथ संपन्न होने वाला यह पर्व दस कैलेंडर दिनों में फैला रहेगा। इस दौरान नवरात्रि की परंपरा के अनुसार मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाएगी।

नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान और उपवास तक सीमित नहीं है। यह शक्ति की उपासना, मन की शुद्धि, आत्मअनुशासन और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देने वाला पर्व है। भक्त इन दिनों मां से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, सद्बुद्धि, समृद्धि और लोककल्याण की प्रार्थना करते हैं।

घटस्थापना से आरंभ होगी शक्ति की साधना

नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा, धार्मिक मान्यता और स्थानीय पंचांग के अनुसार विधि-विधान से पूजन कर सकते हैं।

घटस्थापना के लिए आवश्यक पूजन सामग्री

घटस्थापना से पहले पूजा की सामग्री तैयार कर लेने से अनुष्ठान सरलता से संपन्न किया जा सकता है।

– मिट्टी का पात्र और स्वच्छ मिट्टी।

– जौ के बीज।

– कलश—तांबे, पीतल या मिट्टी का।

– कलश में भरने के लिए स्वच्छ जल।

– आम के पत्ते और नारियल।

– लाल कपड़ा या चुनरी।

– रोली, कुमकुम, हल्दी और अक्षत (चावल)।

– सुपारी, सिक्का और कलावा (मौली)।

– पुष्प, फूलों की माला और दूर्वा (परंपरानुसार)।

– धूप, अगरबत्ती और कपूर।

– घी या तेल का दीपक तथा रुई की बत्ती।

– फल, मिठाई, पंचमेवा और नैवेद्य।

– पूजा की थाली, घंटी और जलपात्र।

– मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र।

– आरती की थाली।

घटस्थापना की सरल विधि: चरण-दर-चरण

1. पूजा स्थल की शुद्धि: स्नान कर पूजा स्थल को स्वच्छ करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

2. जौ बोना: मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी भरकर जौ बोएं और थोड़ा जल छिड़कें। नवरात्रि के दौरान जौ की बढ़त को शुभता और समृद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

3. कलश तैयार करना: कलश में स्वच्छ जल भरें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर नारियल स्थापित करें। नारियल को लाल कपड़े या चुनरी से सजाया जा सकता है।

4. कलश स्थापना: शुभ मुहूर्त में जौ वाले पात्र के पास कलश स्थापित करें। पूजा के दौरान मां भगवती का ध्यान करें और संकल्प लें।

5. मां शैलपुत्री का पूजन: नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री को पुष्प, अक्षत, रोली, फल और नैवेद्य अर्पित करें।

6. दीप-धूप एवं आरती: दीपक प्रज्वलित करें, धूप अर्पित करें और मां दुर्गा की आरती करें।

7. मंत्र-जप और संकल्प: परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और लोककल्याण की कामना करें। श्रद्धानुसार दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें।

8. नौ दिनों तक नियमित पूजा: प्रतिदिन मां की आराधना करें और जौ में आवश्यकता के अनुसार जल दें। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सात्विक आहार एवं संयम के नियमों का पालन करें।

विशेष ध्यान दें: घटस्थापना शुभ मुहूर्त में करना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजन सामग्री और विधि में क्षेत्रीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है। सही मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग का अनुसरण करें।

मां के नौ स्वरूप, जीवन को देते हैं नौ आध्यात्मिक संदेश

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। प्रत्येक स्वरूप श्रद्धालुओं को जीवन में अलग-अलग सद्गुण अपनाने की प्रेरणा देता है।

– मां शैलपुत्री: स्थिरता, श्रद्धा और नई शुरुआत।

– मां ब्रह्मचारिणी: तप, संयम और दृढ़ संकल्प।

– मां चंद्रघंटा: साहस, शांति और निर्भयता।

– मां कूष्मांडा: सृजन, ऊर्जा और सकारात्मकता।

– मां स्कंदमाता: ममता, संरक्षण और वात्सल्य।

– मां कात्यायनी: शक्ति, पराक्रम और धर्मरक्षा।

– मां कालरात्रि: भय पर विजय और संकटों का सामना करने का साहस।

– मां महागौरी: पवित्रता, शांति और करुणा।

– मां सिद्धिदात्री: ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक पूर्णता।

मां के इन स्वरूपों की आराधना का उद्देश्य केवल मनोकामना पूर्ति नहीं, बल्कि अपने भीतर सद्गुणों का विकास करना और जीवन को सकारात्मक दिशा देना भी है।

अष्टमी-नवमी पर विशेष पूजा, हवन और कन्या पूजन की परंपरा

नवरात्रि के दौरान दुर्गाष्टमी और महानवमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। अनेक परिवारों में इन अवसरों पर हवन, कन्या पूजन और विशेष भोग का आयोजन किया जाता है। कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर सम्मान देना, भोजन कराना और उपहार देना इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन अनुष्ठानों की तिथि और मुहूर्त पंचांग के अनुसार निर्धारित करें, क्योंकि स्थानीय परंपराओं और तिथि-निर्णय के कारण पूजा के समय में अंतर हो सकता है।

रतनपुर की मां महामाया के दरबार में उमड़ती है आस्था

छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान में रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर का विशेष स्थान है। नवरात्रि के दौरान यहां मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का आगमन होता है। देवी के प्रति अटूट विश्वास, मंदिर की धार्मिक परंपरा और भक्तिमय वातावरण इस पर्व को विशिष्ट बनाते हैं। श्रद्धालु मां महामाया के चरणों में शीश नवाकर परिवार की खुशहाली, प्रदेश की उन्नति, अच्छी वर्षा, अन्न-समृद्धि और समस्त मानव समाज के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

विजयादशमी पर मिलेगा सत्य और धर्म की विजय का संदेश

20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ शारदीय नवरात्रि पर्व का समापन होगा। यह दिन धर्म की अधर्म पर और सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा की आराधना से शुरू हुई आध्यात्मिक यात्रा विजयादशमी पर साहस, सदाचार और सकारात्मक संकल्प का संदेश देती है।

नवरात्रि हमें याद दिलाती है कि शक्ति का वास्तविक अर्थ केवल सामर्थ्य नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, निर्बलों की रक्षा करने और समाज में सद्भाव बनाए रखने की क्षमता भी है।

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क का आध्यात्मिक संदेश: मां के दरबार में शीश झुकाने के साथ मन में करुणा, व्यवहार में सदाचार और जीवन में सेवा का भाव भी जगाएं। यही भक्ति की सच्ची सार्थकता है।

जय माता दी! 🙏🚩

डिस्क्लेमर: देवी के वाहन संबंधी विवरण पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। 11 से 20 अक्टूबर तक पर्व दस कैलेंडर दिनों में फैला है, जबकि नवरात्रि में नौ स्वरूपों की पूजा की परंपरा है। घटस्थापना, अष्टमी-नवमी और अन्य अनुष्ठानों की तिथि व मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग का अनुसरण करें।

Prachand Prahar

Related Articles

Check Also
Close