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छत्तीसगढ़

सरगुजा ओलंपिक का मैदान तैयार नहीं, खिलाड़ियों को बुलावा पहले! BEO पर भड़के डिप्टी सीएम अरुण साव

पत्थरों से भरे मैदान और अधूरी तैयारियों पर नाराजगी की खबर; सवाल—खेल आयोजन की जिम्मेदारी आखिर किसकी, खिलाड़ियों की सुविधा के लिए जवाबदेही कब तय होगी?

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क, बिलासपुर।

सरगुजा/छत्तीसगढ़। खेल प्रतिभाओं को मंच देने और ग्रामीण खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित सरगुजा ओलंपिक की तैयारियों पर प्रतापपुर में सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने मैदान की स्थिति और आयोजन की तैयारियों को लेकर नाराजगी जताई तथा BEO सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया।

रिपोर्टों में मैदान पर पत्थर होने और खिलाड़ियों को बुलाए जाने के बावजूद पर्याप्त तैयारी नहीं होने की बात सामने आई है। यदि ये स्थितियां सही हैं, तो यह केवल आयोजन की छोटी-मोटी चूक नहीं, बल्कि खेल कार्यक्रमों की योजना, निरीक्षण और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।

मैदान तैयार नहीं, तो खिलाड़ियों को बुलाया क्यों?

खेल आयोजन की सफलता मंच, बैनर और औपचारिक उद्घाटन से नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं से तय होती है। मैदान सुरक्षित और खेलने योग्य है या नहीं, इसकी जांच खिलाड़ियों को बुलाने से पहले होनी चाहिए।

यदि मैदान में पत्थर थे और व्यवस्थाएं अधूरी थीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते निरीक्षण क्यों नहीं किया? खिलाड़ियों को बुलाने से पहले तैयारियों की समीक्षा किस स्तर पर हुई? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब केवल नाराजगी से नहीं, ठोस कार्रवाई से मिलना चाहिए।

डिप्टी सीएम की नाराजगी के बाद क्या बदलेगा?

अधिकारियों को फटकार लगना एक घटना है, लेकिन व्यवस्था में सुधार उसका वास्तविक परिणाम होना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि मैदान को सुरक्षित बनाया जाए, आयोजन की कमियों को दूर किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए जिम्मेदारी तय हो।

खिलाड़ियों के नाम पर आयोजन हो और उन्हें ही बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़े, तो आयोजन के उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्रचंड प्रहार के सीधे सवाल

  • क्या मैदान का निरीक्षण खिलाड़ियों को बुलाने से पहले किया गया था?
  • यदि तैयारियां अधूरी थीं, तो इसकी जवाबदेही किस अधिकारी की बनती है?
  • उपमुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए?
  • क्या आयोजन की गुणवत्ता और खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई समयबद्ध व्यवस्था बनाई गई?

खेल प्रतिभाओं को अवसर देना सरकार की पहल है, लेकिन उस पहल को जमीन पर सफल बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी। सरगुजा ओलंपिक का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब खिलाड़ियों को भाषणों और आयोजनों से आगे बढ़कर सुरक्षित मैदान, बेहतर व्यवस्था और सम्मानजनक अवसर मिलेंगे।

Prachand Prahar

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