“SIR पर बिलासपुर में सियासी संग्राम: 14 कथित आपत्तियों के मुद्दे पर कांग्रेस का हल्लाबोल, CEC के खिलाफ पुतला दहन”
‘वोट चोरी’ के आरोपों से लेकर 14 कथित आपत्तियों तक गरमाया मुद्दा; राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, मतदाता सूची की स्वतंत्र जांच की मांग

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कांग्रेस का विरोध सोमवार को बिलासपुर में सड़क पर दिखाई दिया। जिला कांग्रेस शहर एवं ग्रामीण कमेटी के नेतृत्व में कांग्रेस भवन से गांधी चौक और नेहरू चौक होते हुए कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला गया। कलेक्ट्रेट के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका प्रतीकात्मक पुतला दहन किया। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर CEC को पद से हटाने, उनके खिलाफ कार्रवाई और मतदाता सूची में हुए संशोधनों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई। स्थानीय रिपोर्टों में प्रदर्शन और पुतला दहन की पुष्टि हुई है।

14 कथित आपत्तियों ने बढ़ाया सियासी तापमान
कांग्रेस के प्रदर्शन का सबसे बड़ा राजनीतिक आधार निर्वाचन आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट रही। द इंडियन एक्सप्रेस की 25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ निर्णयों और आदेशों को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नामों को हटाने तथा चुनावी डेटा और IT व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ आपत्तियों में दोनों निर्वाचन आयुक्तों की जानकारी अथवा सहमति के बिना निर्णय लिए जाने का सवाल उठाया गया था। इनमें Form-6 में बदलाव और चुनावी रोल के IT ढांचे में केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं।
कांग्रेस ने उठाए संस्थागत पारदर्शिता पर सवाल
इन्हीं रिपोर्टों को आधार बनाकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता का अभाव रहा और SIR की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा हुई हैं।
कांग्रेस नेताओं ने ‘वोट चोरी’ और राजनीतिक लाभ पहुंचाने जैसे आरोप भी लगाए तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि कांग्रेस के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग का पक्ष भी सामने
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों से निकाले जा रहे राजनीतिक निष्कर्षों को खारिज किया है। आयोग ने कहा कि लिखित टिप्पणियां, सुझाव और अलग-अलग मत बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा कि SIR और अन्य महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की मंजूरी से लिए गए।
26 सितंबर को पूर्ण आयोग की बैठक के बाद निर्वाचन आयोग ने फिर कहा कि देशव्यापी SIR का आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था। आयोग ने मतदाता पंजीकरण और अपनी डिजिटल व्यवस्था की निगरानी को लेकर कुछ प्रक्रियात्मक कदमों की भी जानकारी दी।
यानी विवाद का मूल प्रश्न अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। एक ओर दो निर्वाचन आयुक्तों की कथित लिखित आपत्तियों को लेकर रिपोर्ट सामने आई है, तो दूसरी ओर निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक असहमतियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
कलेक्ट्रेट पहुंचा कांग्रेस का विरोध
बिलासपुर में प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने किया। प्रदर्शन में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, पूर्व विधायक शैलेश पांडे, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अभय नारायण राय, विजय पांडे, प्रमोद नायक, राजेश शुक्ला, राजेंद्र साहू सहित अनेक कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार कार्यकर्ताओं ने CEC और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विभिन्न संदेशों वाली तख्तियां भी प्रदर्शित कीं।
कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ मतदाता सूची में हुए बदलावों की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।
अब सवाल आरोपों से आगे, दस्तावेजों और जांच का
SIR को लेकर कांग्रेस के आरोप और निर्वाचन आयोग का पक्ष आमने-सामने हैं। उपलब्ध रिपोर्टों से इतना स्पष्ट है कि आयोग के भीतर कुछ मुद्दों पर लिखित आपत्तियां दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि आयोग इन आपत्तियों को सामान्य आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मत बता रहा है।
ऐसे में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी, ‘वोट चोरी’ या किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजी साक्ष्य, आधिकारिक जवाब और सक्षम जांच/न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा। फिलहाल बिलासपुर का कांग्रेस प्रदर्शन इस विवाद को राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में बनाए रखने का एक स्थानीय अध्याय है।



