नाबालिगों की लापरवाही से सड़क पर संकट, स्टेशन के सामने पैसे के लिए मारपीट!
सरकंडा में नाबालिग द्वारा कार से टक्कर के मामले में वाहन मालिक पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई; तारबाहर में शराब के लिए पैसे मांगने पर युवक और विधि से संघर्षरत बालक पर मारपीट का आरोप

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
शहर में सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की है। सरकंडा में नाबालिग द्वारा कार चलाने के दौरान हुई सड़क दुर्घटना के मामले में वाहन जब्त कर उसके मालिक के विरुद्ध मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। वहीं, तारबाहर में रेलवे स्टेशन के सामने शराब पीने के लिए पैसे मांगने और इनकार करने पर दो युवकों द्वारा मारपीट किए जाने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है, जबकि विधि से संघर्षरत बालक को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इनके केंद्र में एक अहम सवाल है—सड़क पर वाहन चलाने की जिम्मेदारी हो या सार्वजनिक स्थानों पर आम नागरिकों की सुरक्षा, नियमों और कानून का पालन सुनिश्चित करना कितना जरूरी है?
सरकंडा: नाबालिग के कार चलाने से दुर्घटना, वाहन मालिक पर कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 3:30 बजे स्वर्णिम एरा और गीतांजलि सिटी के पास मारुति सुजुकी स्विफ्ट कार क्रमांक CG 10 BE 1235 और मोटरसाइकिल क्रमांक CG 10 AW 2894 के बीच टक्कर हुई। शिकायतकर्ता साहिल खान के मुताबिक, उनके भाई समीर खान मोटरसाइकिल से काम पर जा रहे थे, तभी सामने से आ रही कार ने उन्हें टक्कर मार दी। शिकायत में कार तेज और लापरवाही से चलाए जाने का आरोप लगाया गया है।
दुर्घटना में समीर खान के बाएं पैर सहित शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आने की बात कही गई है। उन्हें उपचार के लिए बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शिकायत के आधार पर सरकंडा थाने में अपराध क्रमांक 1480/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 281 और 125(a) तथा मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं 3/181, 4/181 और 5/180 के अंतर्गत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
पुलिस की विवेचना में कार चलाने वाला नाबालिग पाया गया। पुलिस के मुताबिक, नाबालिग को विधिक प्रक्रिया के तहत अभिरक्षा में लेकर जमानत मुचलके पर छोड़ा गया। वहीं, वाहन मालिक ओमप्रकाश श्रीवास के कब्जे से दुर्घटना में प्रयुक्त सफेद स्विफ्ट कार, उसकी चाबी और दस्तावेज जब्त किए गए हैं। वाहन मालिक के विरुद्ध मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की आगे जांच जारी है।
यह मामला केवल दुर्घटना तक सीमित नहीं है। नाबालिगों को वाहन सौंपने से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना भी सड़क सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वाहन मालिकों और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे उम्र और वैधानिक पात्रता की अनदेखी कर किसी को वाहन चलाने न दें। हालांकि, इस मामले में वाहन मालिक की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी और अन्य तथ्यों का निर्धारण विवेचना तथा सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
तारबाहर: शराब के लिए पैसे मांगने का आरोप, इनकार पर पेपर कटर से हमला
दूसरी घटना 15 अक्टूबर 2026 की रात बिलासपुर रेलवे स्टेशन के गेट नंबर-1 के सामने की है। तारबाहर पुलिस के अनुसार, मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी थाना क्षेत्र के निवासी कौशल सिंह अपने साथी लखन सिंह के साथ मेमो ट्रेन से सीताफल बेचने बिलासपुर पहुंचे थे। रात करीब 11 बजे टिकट घर के सामने रुकने के दौरान दो युवकों ने कथित तौर पर उनसे शराब पीने के लिए पैसे मांगे।
शिकायत के मुताबिक, पैसे देने से इनकार करने पर दोनों युवकों ने गाली-गलौज की और पेपर कटर से मारपीट की। मामले में तारबाहर थाने में अपराध क्रमांक 357/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 119(1), 296, 351(2) और 115(2) में अपराध दर्ज किया गया।
पुलिस ने बापू नगर, तोरवा निवासी 22 वर्षीय आशिक ननहेट को गिरफ्तार कर घटना में इस्तेमाल किया गया एक पेपर कटर जब्त करने की जानकारी दी है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है, जबकि दूसरे युवक, जो विधि से संघर्षरत बालक है, को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान पर यात्रियों और बाहर से आने वाले लोगों की सुरक्षा विशेष महत्व रखती है। रात के समय यात्रियों को इस तरह की घटनाओं का सामना करना पड़े तो सुरक्षा व्यवस्था और त्वरित पुलिस सहायता की उपलब्धता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इस घटना में सुरक्षा व्यवस्था की कोई विशिष्ट चूक हुई या नहीं, इसका निष्कर्ष उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
कार्रवाई के साथ रोकथाम भी जरूरी
दोनों मामलों में पुलिस की कार्रवाई सामने आई है, लेकिन व्यापक दृष्टि से चुनौती केवल अपराध दर्ज करने या घटना के बाद आरोपी तक पहुंचने की नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की भी है। नाबालिगों के वाहन चलाने पर प्रभावी निगरानी, वाहन मालिकों में कानूनी जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता और रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सतर्क सुरक्षा व्यवस्था इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
इन घटनाओं के आधार पर शहर में अपराधों की समग्र स्थिति पर कोई व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिर भी, सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को न्याय और उचित कानूनी कार्रवाई मिले तथा सार्वजनिक स्थानों पर नागरिक सुरक्षित महसूस करें—यह पुलिस, प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार पक्षों की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क की बात: कानून का उद्देश्य केवल घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नागरिकों को ऐसी घटनाओं से बचाना भी है। नाबालिगों को वाहन सौंपने की लापरवाही हो या सार्वजनिक स्थान पर धमकाकर पैसे मांगने की घटना—हर मामले में निष्पक्ष जांच, वैधानिक कार्रवाई और प्रभावी रोकथाम ही जवाबदेही की असली कसौटी है।



