आयुष्मान पर बयानबाजी या जमीन पर इलाज? – अंकित गौरहा
कांग्रेस नेता का आरोप—“विधायक के बाद मंत्री भी सपना दिखा रहे, सरकार बताए इलाज शुरू होने की तारीख”

बिलासपुर। प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क।
अपोलो अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत हृदय रोग और डायलिसिस का इलाज शुरू होने को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के बयान पर कांग्रेस नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सभापति अंकित गौरहा ने सवाल खड़े किए हैं।

गौरहा का मुख्य आरोप है कि सरकार और जनप्रतिनिधियों की ओर से मरीजों को इलाज की उम्मीद तो दिखाई जा रही है, लेकिन इस सुविधा के लागू होने को लेकर स्पष्ट सरकारी आदेश और निश्चित तारीख सामने नहीं रखी गई है।
“विधायक के बाद मंत्री भी दिखा रहे सपना”
गौरहा ने आरोप लगाया कि पहले बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने आयुष्मान के जरिए इलाज की उम्मीद दिखाई और अब स्वास्थ्य मंत्री भी उसी उम्मीद को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता को अब राजनीतिक बयान या आश्वासन नहीं, बल्कि अपोलो में आयुष्मान से इलाज शुरू होने की स्पष्ट तारीख चाहिए।
आदेश दिखाइए, तारीख बताइए
गौरहा ने मांग की है कि यदि सरकार ने अपोलो में आयुष्मान के माध्यम से हृदय रोग और डायलिसिस जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज का निर्णय लिया है, तो इसकी लिखित सरकारी अधिसूचना/आदेश, लागू होने की तारीख और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
उनका कहना है कि केवल नेताओं के बयानों से मरीजों की समस्या का समाधान नहीं होगा। वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब जरूरतमंद मरीज आयुष्मान कार्ड लेकर अस्पताल पहुंचे और उसे योजना के तहत उपचार मिल सके।
“सपना नहीं, जमीन पर इलाज चाहिए”
गौरहा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाते हुए कहा कि घोषणाओं और जमीनी अमल के बीच अंतर बना हुआ है। उनके मुताबिक गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि इलाज की सुविधा वास्तव में कब से मिलेगी।
यहां गौरहा का सवाल सीधे सरकार की घोषणा के क्रियान्वयन पर है—क्या अपोलो में आयुष्मान से हृदय रोग और डायलिसिस का इलाज वास्तव में शुरू हो रहा है, और यदि हां, तो मरीजों को इसका लाभ कब से मिलेगा?
प्रचंड प्रहार के सीधे सवाल
अगर फैसला हो चुका है तो आदेश सार्वजनिक कब होगा?
अगर आदेश जारी हो चुका है तो लागू होने की तारीख क्या है?
और मरीजों को किन उपचारों और किन शर्तों पर इसका लाभ मिलेगा?
क्योंकि मरीज के लिए बयान नहीं, इलाज मायने रखता है।
मामले में सरकार, स्वास्थ्य मंत्री या संबंधित जनप्रतिनिधियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।



