गरबा की ताल में सितारों का तड़का… लेकिन सवाल भी जरूरी
पंखिड़ा- 4 में रवि किशन और सोनल चौहान की एंट्री, 12-13 अक्टूबर को सजेगा मंच—भव्यता के दावों के बीच बिलासपुर की संस्कृति और आयोजन व्यवस्था की असली कसौटी क्या?
बिलासपुर। प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क।
नवरात्रि में जब शहर गरबा और डांडिया की ताल पर थिरकने की तैयारी कर रहा है, तब बिलासपुर का चर्चित पंखीड़ा सीजन-4 इस बार ग्लैमर का बड़ा मंच बनने जा रहा है। आयोजन में अभिनेता रवि किशन और अभिनेत्री सोनल चौहान की मौजूदगी आकर्षण का केंद्र होगी। 12 और 13 अक्टूबर को महाराजा अग्रसेन भवन, फॉर्च्यून एलिमेंट्स, रायपुर रोड में होने वाले इस दो दिवसीय आयोजन में गरबा, डांडिया, लाइव म्यूजिक और सेलिब्रिटी एंटरटेनमेंट का संगम प्रस्तावित है।

सितारे आएंगे, शहर झूमेगा… पर सवाल भी साथ चलेंगे
बड़े नाम किसी भी आयोजन की चमक बढ़ा सकते हैं। रवि किशन का देसी अंदाज और सोनल चौहान की ग्लैमरस मौजूदगी निश्चित तौर पर भीड़ और युवाओं का आकर्षण बढ़ाएगी।
लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी आयोजन की सफलता सिर्फ मंच पर आने वाले सितारों और भीड़ से तय होगी?
आयोजकों ने आयोजन को पहले से ज्यादा भव्य बनाने की तैयारी की बात कही है। ऐसे में असली कसौटी आयोजन खत्म होने के बाद सामने आएगी—व्यवस्था कैसी रही, सुरक्षा कैसी रही, पार्किंग और यातायात कितना व्यवस्थित रहा और आम दर्शक का अनुभव कैसा रहा?
गरबा संस्कृति या सेलिब्रिटी शो?
गरबा की अपनी लोक-सांस्कृतिक पहचान है। पंखीड़ा को भी पारिवारिक माहौल, भारतीय संस्कृति और सामूहिक उत्सव से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। रिपोर्टों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सहभागिता को आयोजन की विशेषता बताया गया है।
ऐसे में एक सवाल स्वाभाविक है—
क्या आधुनिक मनोरंजन और बॉलीवुड ग्लैमर के बीच गरबा की मूल सांस्कृतिक आत्मा भी उतनी ही मजबूती से दिखाई देगी?
अगर जवाब हां है, तो पंखीड़ा सिर्फ एक इवेंट नहीं बल्कि बिलासपुर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला मंच बन सकता है।
भव्य मंच से आगे भी देखना होगा
बड़े आयोजन का मतलब सिर्फ बड़ा सेटअप और चर्चित कलाकार नहीं होता। भीड़ प्रबंधन, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, आपातकालीन व्यवस्था, पार्किंग, यातायात नियंत्रण और आयोजन स्थल की क्षमता जैसे मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
क्योंकि मंच पर रोशनी कुछ घंटों की होती है, लेकिन अव्यवस्था का असर लंबे समय तक याद रहता है।
अब नजर 12 और 13 अक्टूबर पर
मेगा आर्टिस्ट रिवील के बाद पंखीड़ा-4 को लेकर शहर में उत्सुकता बढ़ी है। आयोजकों की तैयारी और सितारों की मौजूदगी इसे इस साल के प्रमुख गरबा आयोजनों में शामिल करने की कोशिश साफ दिखाई देती है।
अब देखना यह है कि पंखीड़ा सिर्फ सितारों की चमक बिखेरता है या आयोजन की व्यवस्था, संस्कृति और जनसुविधा के पैमाने पर भी अपनी अलग छाप छोड़ता है।
प्रचंड प्रहार का सवाल सीधा है—
सितारे मंच पर होंगे, लेकिन क्या व्यवस्था भी उतनी ही चमकेगी?
प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क, बिलासपुर
खबर वही, जो असर करे।



