285 चालान के बाद भी सवाल बाकी: स्कूलों से आगे मोहल्लों की दुकानों तक पहुंचे निगरानी के कदम
100 गज के दायरे में तंबाकू बिक्री पर सख्ती के निर्देश, लेकिन किराना व छोटी-बड़ी दुकानों में बिकने वाली संदिग्ध नशीली सामग्री पर भी चाहिए प्रभावी निगरानी

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क/बिलासपुर।
तंबाकू उत्पादों की बिक्री और सार्वजनिक स्थानों पर इसके इस्तेमाल के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में अब तक करीब 285 चालानी कार्रवाई हो चुकी है। स्कूल-कॉलेजों के आसपास तंबाकू बिक्री रोकने के लिए 100 गज के दायरे पर विशेष निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं। लेकिन सवाल सिर्फ शैक्षणिक संस्थानों की चारदीवारी तक सीमित नहीं है—शहर की उन छोटी-बड़ी दुकानों तक निगरानी पहुंचाने की जरूरत है, जहां तंबाकू और नशे से जुड़ी सामग्री की बिक्री की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

स्कूलों के 100 गज बाद मोहल्लों की दुकानों पर नजर क्यों नहीं?
कोटपा अधिनियम के तहत स्कूल एवं महाविद्यालयों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक है। जिले में करीब 850 शैक्षणिक संस्थानों में धूम्रपान निषेध बोर्ड लगाए जा चुके हैं। प्रशासन ने शेष संस्थानों में भी नियमों का पालन सुनिश्चित करने और उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
लेकिन तंबाकू नियंत्रण की वास्तविक चुनौती केवल स्कूल-कॉलेजों के आसपास नहीं है। शहर के अलग-अलग मोहल्लों में संचालित किराना दुकानों, पान दुकानों और अन्य छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी प्रतिबंधित अथवा संदिग्ध नशीली सामग्री की बिक्री की आशंका पर नियमित जांच जरूरी है।
भांग /मुनक्का(गोली) के रूप में बिकने वाली संदिग्ध सामग्री भी जांच के दायरे में आए
नशे के खिलाफ अभियान को केवल सिगरेट, गुटखा और तंबाकू उत्पादों तक सीमित रखने से काम नहीं चलेगा। बाजार में यदि भांग, मुनक्का गोली अथवा अन्य रूपों में ऐसी सामग्री उपलब्ध होने की शिकायतें मिलती हैं, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जा रहा हो, तो संबंधित विभागों को उनकी वैधानिक स्थिति की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
यहां सवाल किसी वैध दवा या सामान्य उत्पाद को प्रतिबंधित बताने का नहीं, बल्कि संदिग्ध और अवैध नशीली सामग्री की पहचान, बिक्री के स्रोत और वितरण नेटवर्क की जांच का है। इसके लिए पुलिस, स्वास्थ्य, खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वित निगरानी जरूरी होगी।
285 चालान आंकड़ा है, समाधान नहीं
285 चालानी कार्रवाई निश्चित रूप से कार्रवाई की तस्वीर सामने रखती है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि कार्रवाई के बाद प्रतिबंधित बिक्री कितनी कम हुई और नशे की पहुंच कितनी सीमित हुई।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में कार्रवाई में तेजी लाने और सभी विभागों को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त कर नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं।
अब जरूरत है कि अभियान सिर्फ चालान तक सीमित न रहे, बल्कि स्कूल-कॉलेजों के 100 गज से आगे बढ़कर शहर के मोहल्लों और बाजारों में भी नियमित जांच का रूप ले। क्योंकि बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने की लड़ाई केवल स्कूल के गेट पर नहीं, बल्कि उस गेट से निकलने के बाद उनके आसपास मौजूद पूरे बाजार और माहौल से भी जुड़ी है।
सवाल सीधा है—285 चालानों के बाद अगला कदम सिर्फ संख्या बढ़ाना होगा या नशे की जड़ों तक पहुंचकर बिक्री के स्रोतों पर प्रभावी रोक भी लगेगी?



