अवैध खनिज परिवहन पर प्रशासन की सख्ती: 10 वाहन जब्त, एक मामले में 3 साल का कठोर कारावास
बिलासपुर में खनिज विभाग की कार्रवाई और न्यायालय के फैसले से सख्त संदेश; अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी अंकुश की चुनौती बरकरार।

बिलासपुर। प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क।
बिलासपुर में खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक संपदा की लूट पर प्रशासनिक सख्ती और न्यायिक दंड, दोनों की जरूरत है। एक ओर खनिज विभाग ने चार दिनों के औचक निरीक्षण में 10 वाहन जब्त किए, वहीं दूसरी ओर अवैध रेत परिवहन से जुड़े एक मामले में न्यायालय ने जेसीबी ऑपरेटर को तीन वर्ष के कठोर कारावास और कुल 26 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। ये दोनों घटनाक्रम कार्रवाई की गंभीरता दर्शाते हैं, लेकिन इनके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है—क्या ऐसी कार्रवाई अवैध खनन और परिवहन की पूरी शृंखला पर प्रभावी अंकुश लगा पाएगी?

चार दिन की जांच, 10 वाहन जब्त
कलेक्टर के निर्देश और खनिज विभाग के मार्गदर्शन में 12 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच रतनपुर, कोटा, खोलिपारा, तुरकाडीह, सेंदरी, कोनी, कच्छार, लमेर, निरतु, सकरी, लालखदान, मस्तूरी और लावर सहित विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया गया।
खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम खोलिपारा में रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामले में दो ट्रैक्टर और लमेर में एक ट्रैक्टर पकड़ा गया। लालखदान क्षेत्र में गिट्टी का अवैध परिवहन करते दो हाइवा, सैदा के पास चूना पत्थर डस्ट का परिवहन करते एक हाइवा तथा लावर क्षेत्र में गिट्टी के तीन और रेत का एक हाइवा पकड़ा गया। इस तरह कुल सात हाइवा और तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त किए गए। विभाग के अनुसार, वाहनों को खनिज नियमों के तहत जब्त कर पुलिस थाना कोनी, कोटा और खनिज जांच चौकी लावर की अभिरक्षा में रखा गया है।
न्यायालय का सख्त फैसला, तीन साल का कठोर कारावास
अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ कार्रवाई का दूसरा महत्वपूर्ण घटनाक्रम न्यायालय का फैसला है। खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विशेष न्यायाधीश, खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, बिलासपुर ने अनिल कुमार गौलिया को दोषसिद्ध करते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास और कुल 26 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।प्रकरण 17 जून 2025 का है। विभागीय जानकारी के मुताबिक, नगोई घाट स्थित अरपा नदी से जेसीबी वाहन क्रमांक CG 11 AB 3246 के माध्यम से रेत के अवैध परिवहन के मामले में कार्रवाई की गई थी। वाहन को पुलिस चौकी बेलगहना की अभिरक्षा में रखा गया था और जेसीबी ऑपरेटर अनिल कुमार गौलिया के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया था।
न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2), सहपठित धारा 3(5) के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड तथा खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की संबंधित धाराओं के तहत 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। विभाग के अनुसार, यह मामला उस विशेष अभियान से जुड़ा है, जिसके तहत 15 जून 2025 से खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 66 प्रकरणों में विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
सिर्फ वाहन जब्ती नहीं, पूरे तंत्र पर निगरानी जरूरी
खनिज संपदा का अवैध दोहन केवल सरकारी राजस्व की क्षति तक सीमित नहीं है। इससे पर्यावरण, नदी तंत्र और स्थानीय संसाधनों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में औचक निरीक्षण, वाहन जब्ती और न्यायालय से दंडित होने जैसे कदम महत्वपूर्ण हैं। लेकिन कार्रवाई की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात से भी तय होगी कि अवैध गतिविधियों की पुनरावृत्ति कितनी रुकती है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया कितनी निरंतरता से आगे बढ़ती है।
जब्त वाहनों के मामलों में नियमानुसार आगे की कार्रवाई, संबंधित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी इस अभियान की सफलता के अहम आधार हैं। साथ ही, जहां जांच में अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों या अवैध गतिविधियों की व्यापक शृंखला से जुड़े तथ्य सामने आएं, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
प्रचंड प्रहार की बात
दस वाहन जब्त होना और एक मामले में तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा मिलना कार्रवाई के दो अहम संकेत हैं, लेकिन असली कसौटी केवल कार्रवाई की संख्या नहीं, बल्कि अवैध खनन पर उसके स्थायी प्रभाव की होगी। खनिज संपदा सार्वजनिक संसाधन है, किसी की निजी जागीर नहीं। इसलिए जरूरी है कि प्रशासनिक सख्ती निरंतर बनी रहे, न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़े और अवैध उत्खनन-परिवहन की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी मजबूत हो। कार्रवाई तभी निर्णायक मानी जाएगी, जब जब्ती और सजा की खबरों के साथ अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश के परिणाम भी जमीन पर दिखाई दें।



