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बस पास के लिए 80 साल का इंतजार क्यों? बुजुर्गों की उम्र सीमा घटाने की मांग तेज! विद्यार्थियों के लिए भी रियायत की मांग

पार्षद पुष्पेन्द्र साहू ने 60 वर्ष से निःशुल्क बस पास और विद्यार्थियों को रियायती यात्रा सुविधा देने की मांग उठाई; प्रशासन को सौंपा ज्ञापन।

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क | बिलासपुर

बिलासपुर। वरिष्ठजनों को निःशुल्क बस पास देने की पहल सराहनीय है, लेकिन इसकी पात्रता आयु 80 वर्ष निर्धारित करना कितनी व्यावहारिक है? इसी सवाल के साथ वार्ड क्रमांक 10, गुरु गोविंद सिंह नगर के पार्षद एवं पूर्व राजस्व विभाग प्रभारी पुष्पेन्द्र साहू ने वरिष्ठजनों के लिए आयु सीमा घटाकर 60 वर्ष करने और स्कूली व कॉलेज विद्यार्थियों को निःशुल्क अथवा रियायती बस पास देने की मांग उठाई है।

साहू ने 13 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर, संयुक्त संचालक समाज कल्याण विभाग और नगर निगम आयुक्त को मांग-पत्र सौंपकर कहा कि 80 वर्ष की उम्र तक पहुंचने वाले अनेक बुजुर्गों को शारीरिक कमजोरी, अस्वस्थता और आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस सुविधा का लाभ अधिक व्यापक बनाने के लिए पात्रता आयु पर पुनर्विचार जरूरी है।

बुजुर्गों को राहत, विद्यार्थियों का भी घटे खर्च

मांग-पत्र में कहा गया है कि 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठजनों को अस्पताल, दैनिक जरूरतों और सामाजिक कार्यक्रमों में आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन की जरूरत होती है। निःशुल्क बस पास से उन्हें आर्थिक राहत और आवागमन में सहूलियत मिल सकती है।

वहीं, स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए रोजाना का बस किराया कई परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। ऐसे में विद्यार्थियों को निःशुल्क या रियायती बस पास देने की व्यवस्था शिक्षा तक पहुंच आसान बनाने में मददगार हो सकती है।

सिर्फ घोषणा नहीं, सुविधा जमीन पर भी दिखे

पार्षद ने तीन प्रमुख मांगों के साथ वार्ड स्तर पर बस पास शिविर आयोजित करने और संबंधित विभागों को प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश देने की मांग की है। इससे बुजुर्गों और विद्यार्थियों को आवेदन के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।

अब सवाल प्रशासन से है: क्या वरिष्ठजनों की पात्रता आयु घटाने और विद्यार्थियों को रियायती परिवहन सुविधा देने के प्रस्ताव पर ठोस निर्णय होगा, या जरूरतमंदों को राहत के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

प्रचंड प्रहार न्यूज नेटवर्क
खबर वही जो असर करे।

Prachand Prahar

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